रुद्रपुर। श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के बाद सिडकुल की औद्योगिक इकाइयों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है। उद्यमियों का कहना है कि पहले से बिजली दरों, गैस और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से उद्योग प्रभावित हैं। वहीं अब न्यूनतम वेतन के साथ भत्तों में हुई वृद्धि से उत्पादन लागत और बढ़ जाएगी।
सिडकुल क्षेत्र में वर्तमान में 1200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं जहां तीन लाख से अधिक श्रमिक हैं। नए वेतनमान लागू होने के बाद कंपनियों को मूल वेतन के अलावा ईएसआई, पीएफ, बोनस, यात्रा और अन्य श्रमिक भत्तों पर भी खर्च करना पड़ेगा।
उद्यमियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत से कई छोटी और मध्यम इकाइयों के सामने संचालन की चुनौती है। हाल ही में औद्योगिक बिजली दरों में वृद्धि हुई है जबकि इंडस्ट्रियल गैस का दाम भी बढ़ गया है। इससे ऑटोमोबाइल, प्लास्टिक, फार्मा, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर की इकाइयों की उत्पादन लागत सीधे प्रभावित हुई है।
उद्यमियों ने राज्य सरकार से बिजली दरों में राहत, गैस पर सब्सिडी और एमएसएमई इकाइयों के लिए विशेष पैकेज लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उद्योगों को राहत नहीं मिली तो नई भर्तियों और उत्पादन विस्तार की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
- उद्यमों के विकास के लिए पैकेज जरूरी
- न्यूनतम वेतन बढ़ना श्रमिकों के हित में है लेकिन लगातार बढ़ती बिजली और गैस दरों से उद्योगों की लागत काफी बढ़ गई है। सरकार को उद्योगों के लिए राहत योजना लानी चाहिए। - बीपी सिंह, एचआर हेड
- छोटी इकाइयों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ेगा। वेतन, पीएफ और अन्य भत्तों का खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत प्रभावित होगी। - अमित सिंह, उद्यमी