आम आदमी के स्वास्थ्य और पैसे के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका अंदाजा मानकों को ताख पर रखकर संचालित की जा रहीं निजी पैथोलॉजी लैब से लगाया जा सकता है। गली-गली पैथोलॉजी लैब संचालित हो रही हैं, जिनकी अनुमानित संख्या दो हजार से अधिक है, जबकि स्वास्थ्य विभाग में मात्र 24 का ही पंजीकरण है। जिला मुख्यालय रुद्रपुर में पांच ने ही पंजीकरण करा रखा है, बाकी गैर पंजीकृत हैं।
स्वास्थ्य का हब कहे जाने वाले रुद्रपुर की स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करते हुए दूर-दराज के लोग यहां निजी लैब में जांच के लिए आते हैं। इसमें मामूली जांचों से लेकर बड़ी जांचें तक शामिल हैं, लेकिन बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहीं यह लैब किस तरह से बीमारियों से जूझ रहे लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं। शायद इसका अंदाजा स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं है। इन लैबों में जांच करने वाले विशेेषज्ञों की डिग्री के बारे में भी किसी को नहीं पता। हालांकि सरकारी अस्पतालों में भी खून व अन्य जांचें होती हैं, लेकिन ज्यादातर अस्पतालों में जांच मशीनें या तो खराब हैं या फिर विशेषज्ञों की कमी है। इसलिए मजबूरन लोगों को निजी लैबों का रुख करना पड़ता है।
लैब की रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर मरीज को बीमारी से संबंधित दवाइयां लिखते हैं। वहीं अगर बिना पंजीकृत लैब द्वारा किसी कारण से गलत जांच रिपोर्ट मरीज को दे दी जाए और वह रिपोर्ट के आधार उन दवाइयों का सेवन कर ले तो जान पर बन आती है। इस बात की पुष्टि खुद स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई है कि लैब संचालित करने वाले अधिकांश डॉक्टर का ब्यौरा विभाग में दर्ज नहीं है।
जिले में धड़ल्ले से चल रहीं पैथोलॉजी लैब का आलम यह है कि एक ही खून की जांच दो लैब से कराने पर उनकी रिपोर्ट अलग-अलग आती है। इससे लोग भ्रमित होते हैं। जिला अस्पताल में हजारों की संख्या में ऐसे मरीज आते हैं, जिनको यह शिकायत रहती है कि उन्होंने अपने खून की जांच पहले किसी और लैब में कराई थी। डॉक्टर के कहने पर दूसरी लैब में कराई तो रिपोर्ट में फर्क आया।
मरीजों को जांच के लिए डॉक्टर अपनी पसंदीदा पैथोलॉजी लैब में भेजते हैं। जहां डॉक्टरों का कमीशन भी तय होता है। वे स्पष्ट रूप से मरीज को खास लैब में ही जांच कराने को कहते हैं। वहीं कई निजी अस्पतालों में बिना मानक पूरे किए ही पैथोलॉजी लैब चलाई जा रही हैं।
जिले भर में बड़ी संख्या में लैब चल रही हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग के साथ पुलिस प्रशासन को भी सख्त कदम उठाने चाहिए तभी इन पर अंकुश लग सकता है। दो दिन के भीतर ही बिना पंजीकृत लैब की जांच करवाने के आदेश दिए जाएंगे। उसके बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एचके जोशी, सीएमओ
कहां कितनी पैथोलॉजी लैब हैं पंजीकृत
शहर पंजीकृत लैब संख्या
सितारगंज 05
रुद्रपुर 05
काशीपुर 03
गदरपुर 04
खटीमा 03
बाजपुर 04