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फर्जृ जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे प्रधानाध्यापक बर्खास्त

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सितारगंज। राजकीय प्राथमिक विद्यालय तिलियापुर के प्रधानाध्यापक माखन मंडल का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर डीईओ ने उनकी सेवा समाप्त करते हुए बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्त प्रधानाध्यापक 23 फरवरी 1996 को प्राथमिक विद्यालय शक्तिफार्म नंबर चार में सहायक अध्यापक के पद पर भर्ती हुए थे।
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डीईओ (प्राथमिक) एके सिंह ने बताया कि तीन जून को उप शिक्षाधिकारी सुषमा गौरव के पत्र पर विभागीय जांच की तो पता चला कि प्रधानाध्यापक माखन मंडल पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए नमोशूद्र जाति के हैं। जिन्हें 13 जुलाई 1962 को जारी उत्तर प्रदेश के शासनादेश के तहत अनुसूचित जाति घोषित किया गया है। यूपी सरकार के 26 मार्च 1989 व 16 सितंबर 1989 को जारी शासनादेश के तहत नमोशूद्र जाति का प्रमाण पत्र सिर्फ छात्रवृत्ति सुविधा के लिए मान्य है। लेकिन नमोशूद्र जाति के शिक्षक माखन छात्रवृत्ति के लिए जारी अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र का लाभ लेते हुए सेवायोजित हो गए।
23 मई को तहसीलदार ने जांच आख्या में बताया कि माखन ने शिक्षक पद पर लगाए गए जाति प्रमाण पत्र में कार्यालय और क्रमांक का अंकन नहीं किया गया है और उनके कार्यालय से प्रमाण पत्र निर्गत करना भी प्रतीत नहीं होता। बताया कि तहसीलदार की आख्या में स्पष्ट है कि पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए व्यक्तियों के पाल्यों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्रों के समान छात्रवृत्ति की सुविधा अनुमन्य करने के लिए नमोशूद्र जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है। छात्रवृत्ति के अलावा अन्य कोई लाभ नहीं लिए जा सकते। प्रधानाध्यापक को 17 जून को आरोप पत्र के खिलाफ लिखित पक्ष रखने के लिए छह जुलाई को उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। इस पर माखन ने डीईओ कार्यालय में प्रत्यावेदन भी पेश किया लेकिन संतोषजनक नहीं होने पर डीईओ ने आरोप सही पाए। इस पर प्रधानाध्यापक माखन मंडल को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
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