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Udham Singh Nagar News: आजादी को कैद कर मजबूरी से उत्पाद बिकवाए

Sat, 21 Jun 2025 12:48 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
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काशीपुर। मुफलिसी में जी रहे नेपाल निवासी 32 लड़के नौकरी कर परिवार की बेहतरी के लिए हमवतन विरेंद्र के बहकावे में आकर नौकरी करने काशीपुर पहुंच गए। नौजवानों की उम्मीदों को झटका तब लगा, जब यहां उनकी आजादी को ही छह मकान के कमरे में कैद कर लिया गया। यहीं नहीं मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें जबरन कंपनी के उत्पाद बेचने के लिए विवश भी किया गया।
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नेपाल दूतावास के प्रतिनिधि नवीन जोशी ने युवकों से हिंदी व नेपाली भाषा में जानकारी जुटाई। युवकों ने बताया कि वह लोग गरीब परिवार से हैं। उनको नौकरी की तलाश थी। इसी बीच उनकी मुलाकात विरेंद्र छत्रशाही निवासी धनगढ़ी ग्राम विकास समिति कपले व सचिन निवासी ग्राम कूड़ालंबी थाना खानपुर जिला गाजीपुर हाल निवासी आवास विकास से हुई। दोनों ने भारत में 20 से 30 हजार रुपये वेतन दिलाने की बात कही। नौकरी के लिए युवकों से 10 से 30 हजार रुपये भी वसूल लिए। इसके बाद जनवरी 2025 में गाजीपुर निवासी सचिन से साठगांठ करके उन्हें बनबसा व सुनोली गोरखपुर सीमा से होते हुए रुद्रपुर से काशीपुर में लाया गया।
यहां ओमबिहार कॉलोनी में छह कमरों के किराये के मकान में ठहराया गया। नौकरी के नाम पर लगभग छह महीने पहले उनकी लीड विजन ट्रेडिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में 15 दिन की ट्रेनिंग कराई गई। इसके बाद भी नौकरी नहीं दी गई। नौकरी की बात कहने पर विरेंद्र, सचिन और रुद्रपुर निवासी मनीष ने डरा-धमाकर चुप करा दिया। इसके बाद उन्हें प्रताड़ित करके एक कंपनी के उत्पाद बेचने के लिए मजबूर किया गया। वे लोग डर में काम करते रहे। उन्हें मकान में ही खाना दिया जाता था।
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खुद उत्पाद खरीदकर बेचते थे नेपाली युवक
नेपाली युवकों ने नौकरी देने के बजाय उनसे एक कंपनी के उत्पाद खरीदवाए गए और इन उत्पादों को घर-घर बेचने के लिए मजबूर किया जाता था। बताया कि कुछ लोग नेपाल में भी कंपनी के प्रोडक्ट बेचते हैं, जिसका उनको कमीशन मिलता है।
जनवरी के बाद से अब तक नहीं गए घर
नेपाली युवकों ने बताया कि वह लोग जनवरी 2025 में भारत आ गए थे। वीरेंद्र, सचिन और मनीष ने तब से उन्हें इसी मकान में रखा था। लगभग छह महीने हो गए लेकिन अब तक उनको घर नहीं जाने दिया गया, न ही अपनों से बात करने दी गई।
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