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छोटे उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने पर आईआईएम करेगा काम

Wed, 30 Sep 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/काशीपुर।
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 आईआईएम काशीपुर छोटे उद्योगों में उत्पादन बढ़ाने के लिए काम करेगा। ऐसा पहली बार होगा कि कोई आईआईएम छोटे उद्योगों के उत्पादकता में वृद्धि के लिए उनके साथ मिलकर काम करेगा। पहले चरण में उद्योगों की उत्पादकता में कमी के कारण और उत्पादन में आने वाली समस्याओं पर कार्य किया जाएगा।
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छोटे उद्योगों में उत्पादन क्षमता में कमी को दूर करने के उद्देश्य से 27 जून 2015 को नेशनल प्रोडक्टिविटी कौंसिल नई दिल्ली, आईआईएम काशीपुर व बोस कलस्टर के नाम से प्रसिद्ध नौ सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों ने त्रिपक्षीय सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद अब आईआईएम काशीपुर 9 सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों की प्रबंधन प्रक्रियाओं में लीन मैनेजमेंट व्यवहार लागू कर उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि के लिए काम करने लगा है। पहले चरण में उद्योगों की उत्पादन क्षमता में कमी के कारण समेत उद्योग चलाने में आने वाली दिक्कतों को दूर किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में किस तरह उद्योगों की क्वालिटी को बढ़ाकर बेस्ट माल को कम किया जाए, इस पर काम किया जाएगा। लीन मैनेजमेंट एक्सपर्ट डा. आरके पाधी ने बताया कि लीन मैनेजमेंट व्यवहार का मतलब उद्योगों में उत्पादकता में कमी समेत आने वाली अन्य समस्याओं को दूर करना है। काशीपुर आईआईएम पहला ऐसा आईआईएम है जो छोटे उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए काम करेगा। उन्होंने बताया कि उद्योगों में उत्पादकता में सुधार, क्वालिटी, मशीन का रखरखाव, संसाधनों में कटौती, समय की कमी, अवशिष्ट पदार्थों की कमी के लिए काम किया जाएगा। पांच चरणों में यह काम किया जाएगा। 18 महीनों में उत्पादकता में सुधार लाया जाएगा। पहले चरण में उद्योगों की समस्याओं को जाना जाएगा। आईआईएम संस्थान के छात्र भी इसमें सहयोग करेंगे। उन्होंने बताया कि नौ छोटे उद्योगों का एक समूह बनाया गया है, जिसका नाम बोस क्लस्टर रखा गया है। इसके अलावा आईआईएम में लीन सेंटर भी बनाया गया है।
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