विधानसभा की सबसे बड़ी ग्राम सभा बरीराई के सुंदरपुर गांव में प्रस्तावित ब्रह्मकमल दिव्यांग केंद्र की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। केंद्र बनने से गांव और आसपास के क्षेत्रों के करीब 42 दिव्यांगों को फायदा पहुंचना था, लेकिन केंद्र के लिए चिन्हित सरकारी जमीन का विवाद छह महीने बाद भी सुलझ नहीं सका है।
इसके चलते अब केंद्र को किसी और गांव में स्थापित करने की तैयारी हो रही है।
दरअसल सुंदरपुर गांव में 17 दिव्यांग बच्चे रहते हैं। इसके अलावा उससे सटे दिनेशपुर क्षेत्र में करीब 25 दिव्यांग बच्चे रहते हैं। ज्यादातर दिव्यांग आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हैं। दिव्यांग बच्चों की देखरेख के लिए परिवार के एक सदस्य को घर पर ही रहना पड़ता है। सीडीओ आलोक कुमार पांडेय ने इन परिवारों की मदद के लिए सुंदरपुर गांव में ब्रह्मकमल दिव्यांग केंद्र स्थापित करने की पहल की थी। इसमें बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट भी रखा जाना था।
केंद्र में ही बच्चों को पढ़ाई, स्वास्थ्य और दिन में भोजन मिलता। ग्राम प्रधान ने पंचायत निधि से आठ लाख रुपये देने का आश्वासन दिया था और शेष धन मनरेगा का लगना था। करीब छह महीने पहले गांव में चिन्हित की गई सरकारी जमीन पर जैसे ही निर्माण कार्य शुरू हुआ तो एक पक्ष के लोगों ने मुखर विरोध कर दिया।
उन्होंने सरकारी जमीन पर अपना कब्जा बताया था। मामला तूल पकड़ा तो काम रोक दिया गया था। सीडीओ के अलावा विधायक राजकुमार ठुकराल ने भी विवाद को सुलझाने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। विधायक ठुकराल ने बताया कि केंद्र को स्थापित करने को लेकर प्रयास चल रहे हैं। इधर सीडीओ ने बताया कि एक पक्ष के विरोध के कारण अब दूसरी ग्राम सभाओं में केंद्र स्थापित करने को लेकर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। एक-दो विधायकों ने केंद्र स्थापित करने के लिए धनराशि देने में भी हामी भरी है।