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भेड़ पालन के पुश्तैनी काम से किनारा कर रहा गड़रिया समाज

Mon, 08 Feb 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/बाजपुर।
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सरकार की उपेक्षा के चलते भेड़ पालन के पुश्तैनी कारोबार से करीब 70 फीसदी गड़रिया (पाल) समाज किनारा कर चुका है। जबकि भेड़ और बकरी पालन के लिए भाबर क्षेत्र काफी मुफीद है। बाजपुर क्षेत्र के गांव चकरपुर, बरवाला, चंदनपुरा, बाजपुर गांव, कनौरी क्षेत्र में 32 परिवार ही अब भेड़ पालन करते हैं। इन परिवारों के पास भेड़ों की संख्या करीब 1700 है।
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एक जमाना था कि गड़रिया समाज का मुख्य व्यवसाय बकरी-भेड़ पालन था। लेकिन समाज का युवा वर्ग अपने पुश्तैनी काम को छोड़ता जा रहा है। गांव चकरपुर निवासी शंकर, काशीराम, भोला, धर्मपाल गंगाशरण, दौलत राम, प्रमोद कुमार, रोशनलाल, नारायण दास समेत दस परिवार गांव बरवाला में, हरदयाल सिंह, भकून, होरीलाल, मदन सहित 12 परिवार, गांव कनौरी निवासी मनोहरी लाल, बाजपुर गांव निवासी छोटे लाल इसके अलावा गांव चंदनपुरा निवासी पप्पू सहित दस परिवार ही अब भेड़ पालन कर रहे हैं। गांव चकरपुर निवासी काशीराम ने बताया कि बकरी से भेड़ पालन आर्थिक रुप से फायदेमंद तो है, लेकिन भेड़ के बालों को बेचने के लिए रामपुर (यूपी) जाना पड़ता है। भेड़ के बालों से ऊन बनती है। यूपी क्षेत्र के कुछ कारोबारी भेड़ के बालों को मात्र 10 रुपये किलो तक औने पौने दामों में खरीदते हैं। सरकार की तरफ से बकरी और भेड़ पालन की कोई योजना नही है। जिस कारण समाज के लोगों का इस तरफ रुझान नहीं है।
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