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दोहरा हत्याकांड: जो देता था किराया...उसका मालिक बन जाना नहीं भाया, दो भाइयों ने पिता-पुत्र की हत्या की

Tue, 29 Apr 2025 02:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

दोहरे हत्याकांड के पीछे दुकान और जमीन का हाथ से जाना तो रहा ही, आरोपी किरायेदार के दुकान का मालिक बनने से भी नाराज थे। इससे गुस्साए भाइयों ने बदमाशी के दम पर दुकान कब्जाने की कोशिश की और पिता-पुत्र की हत्या कर दी।
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रुद्रपुर के गल्ला मंडी में इसी दुकान पर कब्जे के लिए हुआ दोहरा हत्याकांड। 
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विस्तार
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रुद्रपुर के गल्ला मंडी में हुए दोहरे हत्याकांड के पीछे दुकान और जमीन का हाथ से जाना तो रहा ही, आरोपी किरायेदार के दुकान का मालिक बनने से भी नाराज थे। दुकान और जमीन को वापस पाने के लिए भाइयों की कोशिश रंग नहीं लाई और अदालत ने भी उनके पक्ष में फैसला नहीं दिया। इससे गुस्साए भाइयों ने बदमाशी के दम पर दुकान कब्जाने की कोशिश की और पिता-पुत्र की हत्या कर दी।

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गल्ला मंडी के मोड़ पर स्थित दुकान पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे में दो भाइयों अवधेश सलूजा और दिनेश सलूजा के हिस्से में आई थी। दिनेश टिंबर व्यापारी था लेकिन उसे कारोबार में घाटा हो गया। गल्ला मंडी में कारोबार समेटकर यह दुकान पांच साल पहले गुरमेज को किराये पर दी गई थी। गुरमेज ने यहां लुधियाना एग्रो ट्रेडर्स नाम से कृषि उपकरण बेचने और मरम्मत का काम शुरू किया था।

दुकान पर उत्तराखंड ग्रामीण बैंक से 32 लाख से अधिक का लोन लिया गया था, लेकिन कर्ज नहीं चुकाने पर बैंक ने सितंबर 2024 में 48.62 लाख रुपये में दुकान नीलाम कर दी। नीलामी में सबसे अधिक बोली लगाकर गुरमेज दुकान के मालिक बन गए थे। यही नहीं, दुकान से सटी करोड़ों की जमीन भी हाथ से निकल गई थी। किरायेदार का मालिक बनना दोनों भाइयों को खल रहा था।
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गुरमेज के बड़े बेटे सुरेंद्र ने बताया कि पांच साल तक वे दुकान में किरायेदार थे। नीलामी के बाद यह उनके नाम हो गई थी। फरवरी में दिनेश और अवधेश ने सिविल कोर्ट में नीलामी को लेकर वाद दायर किया था। इसी बीच, उनके पास पंचायत कर मामला निपटाने की मांग आई थी। उन्होंने मामला कोर्ट में दाखिल होने पर किसी तरह की पंचायत से इन्कार कर दिया था। तीन से चार दिन पहले कोर्ट में वाद खारिज हो गया था। उनको क्या मालूम था कि दुकान उनके पास आने से दोनों भाई इतनी खुन्नस खाए हैं कि उनके पिता व भाई की जान ले लेंगे।

दोहरे हत्याकांड से सकते में आ गए लोग
शहर में उजाला होने पर लोगों को गल्ला मंडी में दोहरे हत्याकांड की जानकारी मिली तो उनके होश उड़ गए। तमाम लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गए। किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, गुरमीत सिंह, सुशील गाबा, हरीश बांगा, सतपाल सिंह, पवन गाबा, संदीप राव, मोहन खेड़ा सहित तमाम लोग घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। सभी ने घटना पर गहरा अफसोस जताया

घटनास्थल से बरामद हुए तीन खोखे
गोलीकांड की सूचना पर पुलिस ने घटनास्थल के चारों ओर घेराबंदी कर दी। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सने दो डंडे, एक तलवार, एक जोड़ी चप्पल जब्त कीं। घटनास्थल पर खड़ी हत्यारोपियों की कार क्रेन से उठवाकर कोतवाली ले जाई गई। पुलिस को दीवार तोड़ने में इस्तेमाल की गई जेसीबी, ट्रैक्टर-ट्रॉली के अलावा दो कारों की भी तलाश है।

32 बोर के मिले खोखे
पुलिस ने घटनास्थल से 32 बोर से तीन खोखे बरामद किए हैं। इन्हें भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। नामजद भाइयों के पास लाइसेंसी असलहा नहीं होने की बात सामने आ रही है। माना जा रहा है कि कंट्री मेड पिस्टल से गोलियां चलाई गईं हैं। पुलिस गोलीकांड में प्रयुक्त असलहे के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस ने खंगाले घटनास्थल के सीसीटीवी कैमरे
गोलीकांड को अंजाम देने वाले आरोपियों के तीन अन्य भाइयों के घटनास्थल से सटे टिंबर कारोबार के प्रतिष्ठान हैं। पुलिस ने घटना के बाद आसपास लगे सीसीटीवी खंगाले। जिस दुकान पर कब्जे की कोशिश हो रही थी, वहां लगे सीसीटीवी में दुकान की दीवार ढहाती जेसीबी कैद हुई है। काफी अंधेरा होने की वजह से ज्यादा साफ नजर नहीं आ रहा है। पुलिस ने घटनास्थल के दोनों ओर सड़कों पर लगे सीसीटीवी भी खंगाले थे। बताया जा रहा है कि अवैध कब्जे से पहले गल्ला मंडी में ही बैठक कर योजना बनाई गई और सीमा से लगे बिलासपुर से कुछ आपराधिक किस्म के लोगों को बुलाया गया।

चौकीदार ने फोन कर दी थी कब्जा होने की सूचना
दुकान पर अवैध कब्जे की सूचना संधू परिवार को इसी क्षेत्र के एक चौकीदार ने फोन पर दी थी। मनप्रीत और गुरप्रीत ने मोबाइल पर सीसीटीवी की लाइव रिकार्डिंग देखी तो एक जेसीबी दुकान की दीवार तोड़ती नजर आई। इस पर पहले गुरमेज और मनप्रीत एक वाहन में घर से दुकान के लिए निकले और उनके पीछे ही सुरेंद्र भी निकल गए थे। वे अनभिज्ञ थे कि दूसरा पक्ष असलहों से लैस है। जैसे ही वे अवैध कब्जा रुकवाने के लिए आगे बढ़े तो उन पर फायर कर दिए गए। गुरमेज और मनप्रीत वहीं ढेर हो गए।

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