रुद्रपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 12 साल पहले काशीपुर में विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पति को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। पुलिस ने दो साल बाद इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी और वादी के विरोध के बाद दोबारा विवेचना के बाद न्यायालय ने सुनवाई हुई थी। रुड़की निवासी मोहम्मद वली ने नौ अप्रैल 2013 में काशीपुर कोतवाली में तहरीर दी थी।
कहा था कि उसकी बेटी गजाला परवीन की शादी पांच दिसंबर 2010 को काशीपुर के बासफोड़ान निवासी तौसिफ अहमद के साथ हुई थी।शादी के कुछ माह बाद ही पति तौसिफ, जेठ रईस अहमद, अकील अहमद, सास मेहरूनिशा , जेठानी कमरजहां और नाजिश उनकी बेटी पर दहेज लाने का दवाब बनाने लगे थे।
इस दौरान गजाला ने एक बेटी को जन्म दिया था, मगर ससुरालियों का रवैया नहीं बदला था। उन्होंने मई 2012 को बेटी के ससुरालियों को कारोबार के लिए पांच लाख रुपये दिए थे। लेकिन कुछ समय बाद बेटी से 20 लाख रुपये और मांगे गए। उन्होंने असमर्थता जताई तो ससुरालियों ने बेटी को मारने की धमकी दी थी।
आठ अप्रैल 2013 की सुबह बेटी ने कॉल कर उसे ससुराल से ले जाने की बात कही थी। इसी शाम बेटी के जेठ ने उनको फोन कर गजाला का पेट दर्द से इंतकाल होने की सूचना दी थी। उन्होंने दहेज की खातिर बेटी की हत्या का अंदेशा जताया था। पुलिस ने पति सहित छह ससुरालियों पर केस दर्ज किया था। इस मुकदमे की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई थी। अदालत में पति पर गजाला को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोष सिद्ध हुआ।
इस पर तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश चंद्र आर्य ने ताैसिफ को सजा सुनाई। इसके अलावा पांच अन्य अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया गया।