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आईआईएम %समन्वय 2019 में विद्यार्थियों को मिले कॉर्पोरेट अनुभव

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आईआईएम काशीपुर के एचआर कॉन्क्लेव-समन्वय 2019 में कई कंपनियों के प्रत‌िन‌िध‌ियों ने ह‌िस्सा ल‌िया? - फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) से रोजगार को खतरा नहीं है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के समानांतर इमोशन इंटेलिजेंस यानी इंसानी समझ भी प्रासंगिक बनी रहेगी। आवश्यकता इस बात की है कि मशीनी समझ को इंसानी दिमाग पर हावी न होने दिया जाए। उसे एक औजार की तरह इस्तेमाल करते हुए दफ्तरों-कारखानों में बेहतर उत्पादकता हासिल की जाए।
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ये विचार रविवार को आईआईएम काशीपुर के एचआर कॉन्क्लेव-समन्वय 2019 में प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ आईआईएम के निदेशक केएस बलूनी समेत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। बलूनी ने काशीपुर के आईआईएम के स्वर्णिम इतिहास व इसकी उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी।
एजीएस ट्रांजेक्ट टेक्नोलॉजी के ग्रुप हेड (एचआर) कैप्टेन पार्थ ने कहा कि रिसर्च बताती है कि दुनिया भर में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के विकास के साथ-साथ इंसानी समझ यानी इमोशनल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण बनी रहेगी। कर्ल ऑन की हेड (एचआर) शिल्पी सक्सेना ने कहा कि मौजूदा दौर में व्यक्ति उपवास रख सकता है लेकिन डिजिटल उपवास नहीं रख सकता। एक भी दिन मोबाइल से दूर रहना उसके लिए मुमकिन नहीं है। कंप्यूटर और इंसानी भावनाओं के सटीक मेलजोल से ही भविष्य मेें नए रोजगारों की राह निकलेगी।
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इस चर्चा में अमर उजाला के सीनियर एडिटर संजय अभिज्ञान, डालमिया ग्रुप के एचआर हेड राजकमल गुप्ता, आईटी बाय डिजाइन के वीपी और एचआर अमूल्य शाह, हेड ऑफ सोल्युशनिंग के श्रीहरि महाले, प्रीमियर इन्फो असिस्टेंट्स के शिवादीप पंजवानी ने विचार रखे। महाले ने कहा कि अर्टिफीशियल इंटेलिजेंस हमारा स्थान लेने के लिए नहीं बल्कि हमारी दक्षता को सुधारने के लिए है।
राजकमल गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता के हिस्से में बहुत सारे रूटीन काम छोड़ कर हम अपना ध्यान अधिक रचनात्मक और रणनीतिक कार्यों में लगा सकते हैं। संजय अभिज्ञान ने स्वचालन और भावनात्मक समझ के उपयोग को इन काव्यात्मक पंक्तियों से समझाया, ‘अगर तू मशीन है तो मुस्करा के दिखा, अगर तू इंटेलिजेंस है तो एक गजल लिखकर दिखा।’
अभिज्ञान ने कहा कि दोनों तरह की समझ के समन्वय से हम सफलता की ऊंचाइयों को छू सकते हैं। चर्चा का संचालन पीपल एचआर एसोसिएट्स के हेड कोच और स्ट्रेटेजिक कंसल्टेंट कृष्णा राव ने किया। पैनल में शामिल विद्वानों ने अपने कॉरपोरेट अनुभव आईआईएम के विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान भी किया।
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