पिथौरागढ़ के मेडिकल काॅलेज को मान्यता मिलने से तराई की उम्मीदों को भी पंख लगे हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने इसी शैक्षणिक सत्र से राजकीय मेडिकल कॉलेज पिथौरागढ़ में एमबीबीएस की 50 सीटों पर प्रेवश की अनुमति दे दी है। अब रुद्रपुर के लिए शासन स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार भवनों का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और साल के अंत तक सभी भवन चिकित्सा शिक्षा विभाग को हैंडओवर कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी भी तेज हो गई है। एक बिल्डिंग को पढ़ाई के लिहाज से पूर्ण कर लिया गया है।
अब तक हो चुके ये काम
600 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहे मेडिकल कॉलेज परिसर में एकेडमिक ब्लॉक, 500 बेड का संबद्ध चिकित्सालय, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल, फैकल्टी के लिए आवासीय भवन और अत्याधुनिक लैब बनाई जा रही हैं। भवनों में एंट्री के लिए मुख्य गेट बनने लगा है। अधिकारियों के अनुसार भवन का स्ट्रक्चर वर्क 100 प्रतिशत पूरा हो चुका है और फिनिशिंग, बिजली, पानी, लिफ्ट और मेडिकल गैस पाइपलाइन का काम अंतिम चरण में है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ाया
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि मौसम ने साथ दिया तो दिसंबर तक भवन का काम पूरा कर हैंडओवर कर दिया जाएगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर प्रशासन का फोकस है। एनएमसी के मानकों के अनुसार फैकल्टी की तैनाती की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल रही है। कॉलेज प्रशासन ने इस सत्र से पहले बैच के लिए एनएमसी से मान्यता लेने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए भारत सरकार के समक्ष अंतिम आवेदन करना होगा। फैकल्टी एक क्लस्टर को पूरा तरह से तैयार कर उसमें पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य है।