रुद्रपुर। विश्व हीमोफीलिया दिवस रविवार को मनाया जाएगा। अनुवांशिक रोग हीमोफीलिया के विषय में जागरूकता के लिए जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
ऊधम सिंह नगर जिले में वर्तमान में हीमोफीलिया के करीब 55 रोगी हैं। सीएमओ डॉ. सुनीता चुफाल रतूड़ी ने बताया कि हीमोफीलिया रोग अनुवांशिक होता है। शरीर पर चोट लगने के बाद खून का निकलना बंद न हो तो यह हीमोफीलिया का लक्षण हो सकता है। हीमोफीलिया से पीड़ित व्यक्ति में रक्त का थक्का ठीक से नहीं बनता है जिस कारण खून लगातार बहता रहता है। इलाज से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। डॉ. चुफाल ने बताया कि हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों को फैक्टर-7, फैक्टर-8 व फैक्टर- 9 के इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
वर्तमान में रुद्रपुर जिला अस्पताल के साथ ही काशीपुर व खटीमा के सरकारी अस्पतालों में यह इंजेक्शन मरीजों के लिए निशुल्क उपलब्ध हैं। इन इंजेक्शनों को सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया के लक्षण मिलने पर तुरंत डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। रविवार को विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जिले में इस रोग के लक्षणों के बारे में व इसके कारणों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही हीमोफीलिया से बचाव को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
काशीपुर के दो लोग लड़ रहे इस बीमारी से
संवाद न्यूज एजेंसी
काशीपुर। काशीपुर क्षेत्र में भी दो लोग हीमोफीलिया बीमारी से जूझ रहे हैं। एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय में इनका इलाज चल रहा है।
एलडी भट्ट राजकीय उप चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव पुनैठा ने बताया कि विश्व हीमोफीलिया दिवस वर्ष 1989 से प्रत्येक वर्ष 17 अप्रैल को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि काशीपुर सरकारी अस्पताल में वर्तमान में दो लोग हीमोफीलिया से पीड़ित हैं। जिसमें एक कुंडा के ग्राम लालपुर निवासी 13 वर्षीय बालक और एक शिवराजपुर निवासी 3 वर्षीय बच्चा है। इन दोनों का लगभग एक साल से इलाज चल रहा है। इन दोनों को समय-समय पर फैक्टर-8 इंजेक्शन लगाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक दस हजार पुरुषों में से एक पुरुष में हीमोफीलिया से पीड़ित होने का जोखिम होता है। ज्यादातर महिलाएं इस रोग के लिए जिम्मेदार आनुवांशिक वाहक की भूमिका निभाती हैं। संवाद
हीमोफीलिया के प्रकार
काशीपुर। हीमोफीलिया ए यह बेहद सामान्य प्रकार है। इसमें रक्त में थक्के बनने के लिए आवश्यक फैक्टर-8 की कमी हो जाती है। जबकि हीमोफीलिया बी यह बेहद कम सामान्य है। हीमोफीलिया से पीड़ित लगभग 20 फीसदी लोगों में हीमोफीलिया बी होता है। हीमोफीलिया बी में क्लॉटिंग कारक फैक्टर-9 की कमी हो जाती है। वहीं, एलडी भट्ट राजकीय उप चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव पुनैठा ने बताया कि इस रोग से पीड़ित को शरीर पर किसी भी प्रकार से चोट अथवा कट से बचाव करना बहुत जरूरी है। संवाद