विधानसभा में दलित महिला हत्याकांड का मामला उठने के बाद मुआवजे का चेक देने के लिए राजनीति हुई। मृतका के पति को चेक देने का क्रेडिट लेने के लिए भाजपा विधायक राजेश शुक्ला और कांग्रेसियों ने डीएम के चैंबर में बांहें चढ़ा लीं। दोनों पक्षों को बमुश्किल समझाकर डीएम ने पीड़ित को चेक दिलवाया। इसके बाद विधायक और कांग्रेसी हिरासत में युवक की मौत मामले में आरोपी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी नहीं होने के विरोध में डीएम पर ही चढ़ बैठे।
भाजपा विधायक राजेश शुक्ला ने दलित महिला हत्याकांड का मामला बीते दिनों विधानसभा सत्र के दौरान उठाया था। इसके बाद मृतका के पति को मुआवजे के रूप में दस लाख रुपए देने की सीएम ने घोषणा की थी। बृहस्पतिवार को देहरादून से पहुंचे दस लाख रुपए के चेक को पीड़ित को देने के लिए जिलाधिकारी पंकज पांडेय ने किच्छा विधायक राजेश शुक्ला को बुलाया, क्योंकि उन्होंने ही विधानसभा में मामला उठाया था। विधायक शुक्ला जब पीड़ित परिवार को चेक देने जिलाधिकारी के चैंबर में पहुंचे और पीड़ित परिवार को चेक दिलवाने को कहा, तब जिलाधिकारी बोले, अभी कुछ और कांग्रेसी आने वाले हैं। इससे विधायक शुक्ला भड़क गए और बोले फिर वह कांग्रेसियों से चेक दिलवा दें, उन्हें क्यों बुलवाया है? इतना कहकर शुक्ला जाने लगे। तभी कुछ कांग्रेसी सामने पड़ गए और उनसे झड़प हो गई। जिलाधिकारी डा. पंकज कुमार पांडेय ने विधायक शुक्ला को पकड़कर रोका। दोनों पक्षों को डीएम ने बमुश्किल समझाया। फिर विधायक शुक्ला और कांग्रेसी नेता पुष्करराज जैन सहित अन्य नेताओं ने मृतका के पति को दस लाख रुपए का चेक दिया। इसके बाद विधायक शुक्ला और कांग्रेसी नेता हरीश बावरा, सेवा सिंह, गणेश उपाध्याय आदि पुलिस कस्टडी में जसविंदर सिंह की मौत के मामले को लेकर चढ़ बैठे। डीएम पर आरोप लगाया कि किच्छा कोतवाली में हजारों लोगों के सामने उन्होंने आरोपी पुलिस कर्मियों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी करने का वादा किया था। लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई। उल्टा अधिकारी मृतक जसविंदर के परिजनों को धमका रहे हैं। अधिकारियों की लाबी जसविंदर के परिजनों के पास सिख समुदाय के अधिकारियों को दबाव बनाने के लिए भेज रही है।