काशीपुर। कुंडेश्वरी के पच्चावाला में सात साल पहले तक रमेश मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। अचानक महंत रमेश नाथ बन गया और कुंडेश्वरी छोड़कर चला गया। बागपत में दो युवकों की हत्या के मामले में उनका नाम सामने आने से स्थानीय लोग हैरत में है। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि रमेश ऐसा भी कर सकता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुंडेश्वरी पच्चावाला में रमेश मेहनत मजदूरी और ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। बेहद शांत स्वभाव का रमेश कभी किसी से लड़ता-झड़ता नहीं था। कब वह महंत बन गया, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। वह सात साल पहले जमीन बेचकर अपने एक बेटे को साथ लेकर कहीं चला गया, इसके बाद से वह कभी यहां नहीं दिखा जबकि उसकी पत्नी रेखा और बेटा कुंडेश्वरी क्षेत्र में कहीं किराये के मकान में रहते हैं। लोगों ने बताया कि बीते कई वर्षों से उसको देखा नहीं है। अब दोहरे हत्याकांड में उसका नाम आने के बाद से हर कोई हैरत में है। अब स्थानीय लोगों को पता चला कि रमेश नाथ महंत बन गया है।
पत्नी और बेटे को उठा ले गई बागपत पुलिस
दोहरे हत्याकांड में महंत रमेश नाथ का नाम आने के बाद से खलबली मची है। अभी तक वह बागपत पुलिस के हाथ नहीं लगा है। ऐसे में बागपत पुलिस बृहस्पतिवार को कुंडेश्वरी पहुंची और उसकी पत्नी रेखा व उसके एक बेटे को उठाकर साथ ले गई। बागपत पुलिस की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। कोतवाली प्रभारी हरेंद्र चौधरी ने बताया कि बागपत पुलिस हत्यारोपी महंत की पत्नी और उसके बेटे को अपने साथ पूछताछ के लिए बागपत ले गई है। महंत का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।
यह है बागपत का हत्याकांड
बागपत के सिंगौली तगा निवासी दिव्यांग अंकित (28) और इसरार (32) आपस में दोस्त थे और घर में वॉल पुट्टी का काम करते थे। 25 जुलाई को दोनों दोस्त मोटरसाइकिल से रटौल के लिए निकले थे लेकिन वापस घर नहीं पहुंचे। परिजनों ने चांदीनगर थाना में तहरीर सौंप कर गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस की जांच में काशीपुर के कुंडेश्वरी के ग्राम पच्चावाला निवासी महंत रमेश नाथ के ऊपर शक की सुई घूमी। पुलिस ने महंत के शिष्य उज्ज्वल निवासी पूरनपुर नवादा और कृष्ण यादव निवासी धुम्मा भुलंदी जिला जौनपुर को हिरासत में लेकर पूछताछ की। दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि महंत के अंकित की बहन से अवैध संबंध थे। अंकित व उसका दोस्त इसका विरोध करते थे और 25 जुलाई को महंत से बात करने आए थे। तब उसने पहले चाय पिलाई, इसके बाद जहर का इंजेक्शन लगाकर दोनों को मंदिर प्रांगण में ही धूनी के पास गड्ढा खोदकर उन्हें दबा दिया था। इसके बाद से महंत रमेशनाथ और उसका बेटा भाग गए।