पेट की भूख मिटाने की कोशिश में गई दो मजदूरों की जान के लिए दोषी कौन ? यह सवाल कंजाबाग रोड भूड़ महोलिया में निर्माणाधीन मकान के ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवीए की हवा में झूलती लाइन को देखने वालों के मन व मस्तिष्क में कौंधता रहा। दो मजदूरों की मौत के बाद गम में डूबे परिवारों के साथ ही दुर्घटना पर सिंपैथी जताने वाले जागरूक नागरिक यह सोचते नहीं अघाते कि आखिर तार हवा में क्यों झूलते रहे।
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन के एसडीओ अंबिका यादव, जेई पवन उप्रेती व सन्नी गोस्वामी सफाई देते रहे कि घटना स्थल पर लंबे समय से विभाग की एक पोल लगाने की योजना थी। मौके पर पोल भी रखा है लेकिन मकान स्वामी ने हवा में झूलती लाइन पर खंभा नहीं लगाने दिया। एसडीओ यादव ने बताया कि इस संबंध में तीन बार बैठक हो चुकी थी।
जेई उप्रेती ने मृतक मजदूरों के परिवारों को बताया कि मकान निर्माण के समय उन्होंने मौके पर जाकर सचेत भी किया था कि सावधानी से निर्माण कराए घटना घट सकती है। कंजाबाग रोड निवासी वरिष्ठ भाजना नेता केशर सिंह बिष्ट ने अस्वस्थ हालत में बताया कि इस लाईन को हटाने बावत वे वरिष्ठ मंत्रियों से कई बार मिल चुके थे।
भाजपा नेता बिष्ट ने बताया कि तत्कालीन उर्जा मंत्री भगत सिंह कोश्यारी की टेबल पर उन्होंने 11 हजार केवीए की लाइन हटाने बावत प्रार्थना पत्र दिया था। बावजूद उनके अनुरोध पर उर्जा मंत्री ने उचित कार्रवाई करने का रिमार्क लगाकर इतिश्री कर दी। भाजपा नेता बिष्ट ने यह भी कहा कि एसडीओ हाइडिल लाइन हटाने को उचित बजट स्वीकृत होने पर ही कार्रवाई संभव बताते रहे।