दिव्यांग को गोद में उठाकर वोट डालने जाता युवक।
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मतदान के लिए दिव्यांग और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों का उत्साह भी स्वस्थ लोगों से कम नहीं था। कोई अपनों के कंधों पर बैठकर बूथ तक पहुंचा तो आंखों की रोशनी ना होने पर किसी का हौसला नहीं डिगा। साथ ही किसी ने बैसाखी का सहारा लिया तो पैरों से लाचार कोई जमीन पर रगड़कर बूथ तक पहुंचकर मतदान की जिम्मेदारी को निभा गया।
रुद्रपुर के कई पोलिंग बूथों पर दिव्यांग मतदाता मतदान की जिम्मेदारी निभाकर लोगों के लिए प्रेरणा बने। संजयनगर खेड़ा में आंखों की रोशनी खो चुकी एक महिला ने अपने बेटे के सहारे बूथ पहुंचकर मतदान किया तो ट्रांजिट कैंप में पैरों से दिव्यांग युवक को उसका भाई अपने कंधे पर बैठाकर बूथ तक लाया।
रम्पुरा निवासी राधा ने पैरों से लाचार होने के बाद भी बैसाखी के सहारे बूथ पहुंचकर मतदान किया। पोलियो ग्रस्त रंपुरा निवासी चंद्रपाल भी अपनी पत्नी की मदद से बूथ पहुंचा और मतदान किया। इसके साथ ही दो दिन पूर्व अपनी आंख का ऑपरेशन करने वाले रम्पुरा निवासी प्रेमपाल कोली ने भी अपने पड़ोसी की मदद से बूथ पहुंचकर मतदान किया। 100 साल की सुबहा भी अपने बेटे की गोद में बैठकर मतदान करने पहुंची। 90 वर्ष की नत्थों ने भी चलने में सक्षम ना होने पर लोगों की मदद से बूथ पहुंचकर मतदान किया।