यूएसनगर जिले की आधी आबादी के लिए यह साल अपराधों के लिहाज से बेहद चिंताजनक रहा। महिला और दहेज हत्या का आंकड़ा तो बढ़ा ही साथ में दुराचार और छेड़खानी के मामलों में भी इजाफा हुआ। तीन सालों में महिला अपराधों का ग्राफ इस साल चरम पर जा पहुंच चुका है। जिले में आधी आबादी के प्रति लगातार बढ़ते अपराध बेहद चिंताजनक हालात की ओर इशारा कर रहे हैं।
दरअसल बीते कुछ सालों में महिलाओं के प्रति अपराधों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कड़े कानून बनने के बाद भी दहेज हत्या, बलात्कार और छेड़खानी के मामले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। अपराधों की दृष्टि से संवेदनशील यूएसनगर जिले में भी आधी आबादी महफूज नहीं है। आंकड़ों पर नजर डालें तो खतरनाक स्थितियों की अंदाजा हो जाता है। वर्ष 2013 में जिले में 12 महिलाओं की हत्याएं हुई, 14 में आंकड़ा घटकर 7 हुआ और 15 में यह 14 तक जा पहुंचा है। दहेज हत्या का आंकड़ा पिछले साल के बराबर ही रहा, लेकिन रेप के मामलों में इजाफा हुआ।
वर्ष 13 में 40,14 में 41 और 15 में यह आंकड़ा 56 तक जा पहुंचा है। पिछले साल जहां छेडख़ानी के 61 मामले दर्ज थे, वो अब (15 दिसंबर तक) 64 तक जा पहुंचे हैं। अपहरण की आंकड़ा भी 67 तक जा पहुंचा है। कुल मिलाकर आंकड़े भयावह स्थितियों की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि विभाग में महिला पुलिसकर्मियों की भी खासी कमी है। जिले मेें पांच महिला दरोगा, 10 महिला हेड कांस्टेबल और 127 महिला सिपाही ही तैनात हैं। इंस्पेक्टर तो दूर जिले के कुल थानों के एक चौथाई भी महिला दरोगा तक नहीं है। एसएसपी केवल खुराना कहते हैं कि जागरूकता की वजह से महिलाएं अपने खिलाफ हो रहे जुल्मों के प्रति आगे आ रही हैं। आंकड़ों की संख्या में इसलिए इजाफा हो रहा है।
कोर्ट की सख्ती के चलते भी अपराध दर्ज हो रहे हैं। एसएसपी केवल खुराना कहते हैं कि आंकड़े बढ़ना जागरूकता का नतीजा है। महिला अपराधों की घटनाएं रोकने के लिए शौर्या टीम और थानों की पुलिस को अलर्ट होने की जरूरत है। यह कोशिश होगी कि रात हो चाहे दिन महिलाएं अपने खिलाफ हो रहे अपराधों के खिलाफ शिकायत करने के लिए पुलिस के पास जाने से कतराएं नहीं। जो पुलिस कर्मी इन अपराधों पर कार्यवाही करने में लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी। पुलिस और महिलाओं के बीच संवादहीनता खत्म की जाएगी। महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की तकनीक भी सिखाई जाएगी।