राधेहरि राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पुस्तकालय के लिए पुस्तकों की खरीद में हुए घपले की जांच रस्म अदायगी तक रही। खरीद से जुड़े दस्तावेज न मिल पाने के कारण समिति ने जांच का दायरा सिर्फ पुस्तकों की संख्या तक ही सीमित रखा।
प्राचार्य की अनुपस्थिति में बृहस्पतिवार को जांच रिपोर्ट मुख्य लिपिक को सौंप दी गई। महाविद्यालय की लाइब्रेरी में मंगाई गई पुस्तकों के मूल्य पर कालिख पुती होने और बिल के मुताबिक पुस्तकालय में कम पुस्तकें होने के आरोपों के चलते प्राचार्य डॉ. एएस सिराड़ी ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। समिति ने जांच शुरू करते हुए प्राचार्य से पुस्तकों की खरीद से जुड़े प्रपत्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। जांच चार दिनों तक चली। लेकिन प्राचार्य ने टालमटोल कर उन्हें पुस्तकों की खरीद से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
हालांकि प्राचार्य ने समिति को पुस्तकालय में मंगाई गई पुस्तकों की सूची जरूर उपलब्ध करा दी। जिसमें 3200 से अधिक किताबे मंगाने की जानकारी दी गई। यह किताबें अगस्त माह में मंगाई गई थी। समिति ने लाइब्रेरी में आई मूल्य अंकित व मूल्य पर कालिख पुती पुस्तकों की अलग-अलग गिनती की। मूल्य पर कालिख पुती पुस्तकों की संख्या 1342 होना पाई गई। जबकि मूल्य अंकित पुस्तकें 276 होना पाई गई। जांच के दौरान बिल में दर्ज करीब 1600 पुस्तकें कम पाई गई।
जांच समिति ने अगस्त में आई पुस्तकों की संख्या के संबंध में दो परिचायकों बलवीर सिंह व सुनील कुमार से भी लिखित रिपोर्ट ले ली है। समिति ने अपनी जांच पुस्तकों की संख्या तक ही सीमित रखी। पुस्तकों के बिल इत्यादि उपलब्ध न होने के कारण कथित घोटाले को लेकर समिति अपनी राय नहीं दे पाई। समिति के पांच में से चार सदस्यों ने अपनी जांच आख्या प्राचार्य की अनुपस्थिति में कार्यालय के लिपिक चंद्रशेखर पांडे को सौंप दी है। भौतिक विभाग के संकाय अध्यक्ष डॉ. डीआर मिश्रा ने इस रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए। इस रिपोर्ट पर प्राचार्य द्वारा अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।