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गुर्जरों ने डाली थी किच्छा, पुलभट्टा और बाजपुर में डकैती

Sun, 02 Oct 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रपुर
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डकैती के अाराे‌‌प‌ियाें के साथ्‍ा पु‌‌‌‌‌ल‌िस टीम - फोटो : अमर उजाला
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 जिले की पुलिस ने शनिवार को बाजपुर, पुलभट्टा और किच्छा की बड़ी डकैतियों का खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार तीनों घटनाओं को बाजपुर के गुर्जर परिवार के सदस्यों ने हरियाणा के शातिर बदमाशों के साथ मिलकर अंजाम दिया। फिलहाल तीन बदमाश पुलिस की हिरासत में हैं जबकि गैंग के सरगना सहित दो अन्य आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आ सके। पकड़े गए आरोपियों से पुलिस ने भारी मात्रा में नगदी, चांदी के जेवर, बाइक, कार और तमंचे बरामद किए हैं। लूटे गए सोने के बारे में पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है।
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 कुछ दिन पहले किच्छा, पुलभट्टा और बाजपुर में हुई डकैती का खुलासा करते हुए डीआईजी अजय रौतेला ने पत्रकारों को बताया कि डकैती की लगातार हुई घटनाओं की जांच में जुटी रुद्रपुर और बाजपुर पुलिस की टीम को कुछ दिन पहले अहम सुराग मिले। इसके बाद एएसपी पंकज भट्ट की मानीटरिंग में पुलिस की पांच टीमों का गठन किया गया। टीमों ने विभिन्न जिलों में दबिश देने के साथ ही जेल से छूटे अपराधियों का रिकार्ड भी खंगाला। इसमें से पांच गैंग के तीन महीने पहले जेल से छूटने की पुष्टि हुई। दबिश देने पर चार गैंग हाथ लगे, जिनसे कोई सुराग हाथ नहीं लगा। पांचवें गैंग के ग्राम हरिपुरा हरसान रायपुर खत्ता थाना बाजपुर निवासी सरताज उर्फ चन्नी, यासीन अली और जाकिर को पकड़ने पर डकैती की परतें खुलती चली गईं।

पकड़े गए तीनों आरोपियों ने गैंग के सरगना इरशाद रिजवान और दो हरियाणा के बदमाशों के साथ घटना को अंजाम दिया। आरोपियों ने 27 सितंबर को पुराना गल्ला मंडी किच्छा निवासी मुकेश अग्रवाल, 7 सितंबर को ग्राम शिवली पुलभट्टा निवासी चन्दन सिंह और 7 सितंबर की ही रात को ग्राम नगदपुरी बरहैनी बाजपुर के घरों में डकैती की डाली। तीनों आरोपियों सरताज, यासीन और जाकिर को रायपुर खत्ता बाजपुर से शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों से पुलिस ने पांच लाख 65 हजार की नगदी, दस किलो चांदी, 12 मोबाइल, तीन बाइक, एक होंडा सिटी कार, तीन देसी तमंचों के साथ ही 11 जिंदा कारतूस और तीन खोखा कारतूस बरामद किए हैं।
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 तीनों बड़ी डकैतियों की घटना को अंजाम देने वाले पांच लोग एक ही गुर्जर परिवार के रिश्तेदार हैं जबकि दो अन्य हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं। गैंग का सरगना इरशाद तीन महीने पहले ही हल्द्वानी की जेल से बल्कि रिजवान मुरादाबाद की जेल से छूटा है। पुलिस के अनुसार इन दोनों ने हरियाणा के बदमाशों से मिलने के बाद अपने अन्य पारिवारिक साथियों के साथ मिलकर गैंग बनाया। डकैती की योजना बनाने के बाद हरियाणा के बदमाशों ने पहले रेकी की। सरगना इरशाद का परिचय कैसे और कब हरियाणा के बदमाशों से हुआ, इसकी जानकारी पुलिस को नहीं है।



किच्छा, पुलभट्टा और बाजपुर की डकैती की घटना का खुलासा करने वाली टीम पर पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ ही किच्छा डकैती के पीड़ित ने भी इनामों की बौछार की है। टीम को डीजीपी द्वारा बीस हजार, डीआईजी द्वारा पांच हजार, एसएसपी द्वारा ढाई हजार और किच्छा डकैती के वादी मुकेश अग्रवाल ने 51 हजार का इनाम देने की घोषणा की है। उधर, कांग्रेस नेता अजय तिवारी ने 11 हजार रुपये का चेक सौंपा है।  



तीनों डकैतियों का खुलासे करने वाली पुलिस ने जहां पकड़े गये आरोपियों से नगदी और चांदी के बर्तन, जेवर बरामद कर लिए, वहीं लूट के सोने को पुलिस बरामद नहीं कर सकी। पुलिस के अनुसार डकैती के बाद गैंग के सदस्यों के बीच नगदी और सोने का बंटवारा हुआ। इसमें से नगदी इरशाद और उसके लोकल के साथियों के हिस्से में आई जबकि सोने को हरियाणा के बदमाश अपने साथ ले गए।
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डकैतों तक पहुंचने में कार भी बनी कारगर
रुद्रपुर। पुलिस टीम के लिए डकैतों तक पहुंचने में कार कारगर साबित हुई। किच्छा डकैती के दिन ही पुलिस को डकैतों के कार से आने की जानकारी मिली थी। इस पर पुलिस ने कार को ट्रेस करना शुरु किया। इसके आधार पर जानकारी मिली कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों की होंडा सिटी कार का इंजन जाम हो गया था और कार को क्षेत्र के ही एक गैराज में रख दिया गया। इसी गैराज से पुलिस ने कार को बरामद किया।


 एएसपी पंकज भट्ट की मानीटरिंग में किच्छा, बाजपुर और पुलभट्टा में हुई डकैती का खुलासा करने में जिन पुलिस के अधिकारियों और जवानों ने अहम भूमिका निभाई। उसमें एएसपी मंजूनाथ टीसी, सीओ खटीमा राजेश भट्ट, बाजपुर कोतवाल भूपेंद्र सिह धौनी, थानाध्यक्ष पुलभट्टा हरेंद्र चौधरी, थानाध्यक्ष ढनकर्दया नरेश पाल, थानाध्यक्ष आईटीआई नरेश चौहान, थानाध्यक्ष ट्रांजिट कैंप सुशील कुमार, एसआई कमाल हसन और हेड कांस्टेबल एसओजी प्रकाश भगत अपनी टीम के साथ शामिल रहे। सभी को पांच टीमों में बांटा गया था। जिसमें से दो टीमों का नेतृत्व एएसपी मंजूनाथ टीसी ने और तीन टीमों का नेतृत्व राजेश भट्ट ने किया।
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