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बोझ बन चुकी हैं सरकारी चीनी मिलें

Fri, 22 Jan 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/काशीपुर।
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सरकारी और सहकारी चीनी मिलें सरकार पर बोझ बन चुकी हैं। राज्य गठन के बाद सरकार सरकारी व सहकारी चीनी मिलों को वर्ष 2015 तक 732 करोड़ 56 लाख रुपया दे चुकी हैं। ब्याज सहित यह धनराशि 1235 करोड़ 10 लाख रुपये बन गई है।
गन्ना आयुक्त के जन संपर्क अधिकारी कमल किशोर जोशी ने बताया कि सभी सहकारी, सरकारी चीनी मिलों को सरकार ने जो धनराशि स्वयं एवं विभिन्न संस्थाओं से दिलाई है।
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 मिलों ने अब तक वह नहीं लौटाई है। जबकि गन्ना एवं चीनी आयुक्त समय-समय पर मिलों को ब्याज पर दिलाई गई धनराशि लौटाने का निर्देश देते आ रहे है।
सरकार ने राज्य गठन के बाद वर्ष 2001 से वर्ष 2015 तक सहकारी चीनी मिल सितारगंज को 14631.53 करोड़, बाजपुर शुगर मिल को 12790.69 करोड़, गदरपुर चीनी मिल को 11,180 करोड़, नादेही को 11382.69 करोड़ रुपया दिया। सरकारी चीनी मिल किच्छा को 10831.69 करोड़, डोईवाला 1238946 करोड़ रुपया दिया।
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सरकार ने सहकारी चीनी मिलों को कुल 73256.09 करोड़ रुपया कर्ज दिया। सितारंगज चीनी मिल पर 25039.32 करोड़, गदरपुर 19216 करोड़, बाजपुर 19576.37 करोड़, नादेही 18450.10 करोड़, किच्छा 18527.89 करोड़, डोइवाला 22700.35 करोड़ रुपया बन चुका है।


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