जिले में पिछले दो साल से विलय के नाम पर जिले में करीब 15 राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं। अब शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने बंद हो चुके सरकारी विद्यालयों को नए स्कूल तक पहुंचाने के लिए वाहनों का किराया-भाड़ा देने का निर्णय लिया है।
जिले में 792 प्राथमिक विद्यालयों में से करीब 15 स्कूल बंद हो चुके हैं। बंद हो रहे प्राथमिक विद्यालयों की अगले जूनियर हाईस्कूलों से अधिक दूरी होने से गरीब अभिभावकों के माथे पर शिकन पड़ने लगी है। गदरपुर के सरोवरनगर ग्रामसभा के लोगों ने डीईओ बेसिक को इस बाबत पत्र लिखकर समस्या के हल की मांग की थी।
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने विलय होने वाले प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को जूनियर हाईस्कूल तक पहुंचाने में लगने वाले किराया-भाड़े का स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है। गत दिनों सरकारी विद्यालयों की बदहाली को देखते हुए जिले मेें पिछले दिनों एक निजी संस्था ने 100 सरकारी स्कूलों को गोद लेने का ऐलान किया है।
जिन प्राथमिक विद्यालयों का विलय हो रहा है, उन विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को दृसरे विद्यालयों तक पहुंचने पर लगने वाला किराया-भाड़ा सरकार देगी। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन द्वारा इसकी रणनीति बना ली गई। शासन स्तर पर इसकी लिए मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। -
हीरालाल गौतम, सीईओ, ऊधमसिंह नगर