सरकारी अस्पताल में बीते एक साल से अल्ट्रासाउंड बंद होने से गरीबों को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात यह है कि गरीबों को प्राइवेट लैब से अल्ट्रासाउंड कराने में जेब ढीली करनी पड़ रही है।
एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तो है लेकिन बीते एक साल से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। जिसके चलते गरीब जनता को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने में अधिक रुपया खर्चा करना पड़ रहा है। दरअसल जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं का सरकारी अस्पताल में निशुल्क अल्ट्रासाउंड होता है। लेकिन एक साल पहले रेडियोलॉजिस्ट डॉ. टीके पंत का स्थानांतरण अल्मोड़ा हो गया। उनके स्थान पर किसी भी रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती अस्पताल में नहीं होने से गरीब तबके के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां बता दें डॉ. टीके पंत के समय प्रतिदिन 30 से 35 अल्ट्रासाउंड होते थे। अल्ट्रासाउंड की सरकारी फीस 220 रुपये थी। लेकिन वर्तमान में बाहर से अल्ट्रासाउंड कराने पर मरीजों को 600 से 800 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। अल्ट्रासाउंड नहीं होने से जननी सुरक्षा योजना भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। वहीं लाखों की कीमत की अल्ट्रासाउंड मशीन भी धूल फांक रही है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. पीके सिंह ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट की भर्ती नहीं होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। अधिकारियों को इस संबंध में सूचित किया जा चुका है।