काशीपुर। आपातकाल में देशद्रोही गतिविधियों में शामिल होने की बात स्वीकार करने के लिए महेश चंद्र अग्रवाल को यातनाएं दी गईं। उन्होंने पुलिस के लाठी-डंडे सहे, लेकिन अपनी जुबां पर अड़े रहे। उन्होंने आपातकाल के जुल्म को रुंधे गले से बयां करते हुए सरकार को जुल्म की दास्तान सुनाई।
मोहल्ला सिंघान निवासी महेश चंद्र अग्रवाल (77) स्व. किशोर लाल मूल रूप से रामनगर के निवासी हैं। वह बचपन से जनसंघ से जुड़े रहे। बताया कि वह काशीपुर व्यापार करने आए और यहां किराये के मकान व दुकान लेकर परिवार का भरण-पोषण करने लगे। 25 जून 1975 की रात देश में आपातकाल लगा।
बताया 17 जुलाई की शाम को वह दुकान पर बैठे थे। कोतवाल रामचरण आए और कुछ बात करनी है कहकर उनको अपने साथ ले गए। जैसे ही वह कोतवाली पहुंचे उनके हाथ हथकड़ी और पैर में बेड़ी डाल दी। पूछने पर बताया कि आपको मीसा के तहत गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोप लगाया कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ लोगों को भड़का रहे थे। उन्हें 19 जुलाई को नैनीताल जेल में बंद कर दिया गया।
उन्होंने बताया वह 127 दिन जेल में रहे। बताया एक दिन जेल में बंद लोगों ने इंदिरा गांधी के खिलाफ नारेबाजी की तो दो दिन खाना नहीं मिला। इस दौरान मीसा में बंद लोगों को कैदियों से पिटवाया गया। बताया इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सदस्यों को ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार किया गया था।