झोपड़ी में सो रहे एक व्यक्ति की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) ने पांच भाइयों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी अभियुक्तों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने मृतक की पत्नी पर जानलेवा हमला करने के मामले में भी अभियुक्तों को दोषी माना। इसके लिए आरोपियों को दस-दस वर्ष का कठोर कारावास और तीन-तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई है। इसके अलावा, धारा 452, 506 और 147 के तहत भी आरोपियों पर सजा और जुर्माना लगाया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माने की आधी राशि मृतक की पत्नी को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाए।
आठ मई 2009 की रात सोबरन सिंह पत्नी उर्मिला के साथ झोपड़ी में सो रहे थे। रात में लाठी-डंडे, तमंचे और छुरी लेकर कुछ लोग उसकी झोपड़ी में घुस आए और सोबरन की हत्या कर दी, जबकि उसकी पत्नी उर्मिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया। नौ मई को मृतक के भाई धर्मजीत सिंह ने बाजपुर कोतवाली में हेम सिंह, केवल सिंह, मोर सिंह, हुकुम सिंह उर्फ हुक्मी और चंद्रपाल (सगे भाई) के खिलाफ धारा 302, 307, 452, 506 और 147 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सभी हत्यारोपी भाई जिला बदायूं थाना कादर चौक के ग्राम पांडेनगला निवासी हैं। ये सभी बाजपुर और आसपास के शहरों में तंबू लगाकर जड़ी-बूटियां बेचते हैं।
मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) प्रीतु शर्मा की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से मुकदमे के वादी धर्मजीत, साक्षी उर्मिला, सुखदेव सिंह, तत्कालीन कोतवाल डीआर आर्य, उपनिरीक्षक जगत सिंह, डॉ. कामेश राणा व डॉ. अतुल कुमार के बयान दर्ज कराए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी शासकीय अधिवक्ता संतोष नकवी ने की।