सितारगंज। सरकड़ा चीनी मिल परिसर में तेंदुए के लिए लगाए गए पिंजरे में एक फिशिंग कैट फंस गई। हालांकि तेंदुए का अभी तक कोई पता नहीं चला। कैट को उसके वासस्थल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है। वन विभाग अभी भी तेंदुए की निगरानी के लिए सतर्कता बरत रहा है।
कई दिनों से सरकड़ा चीनीमिल परिसर में तेंदुए के होने की खबर से आसपास के इलाके में दहशत फैली हुई है। वन विभाग ने इस इलाके में पिंजरा लगाने के साथ ही ट्रैप कैमरे लगाए थे। सोमवार शाम अचानक कैमरे में फिशिंग कैट फंस गई। बाराकोली रेंज के प्रभारी रेंजर आईएफएस अभिमन्यु सिंह ने बताया कि फिशिंग कैट से मानव को कोई खतरा नहीं है। प्राकृतिक आवास की हानि के कारण यह कैट अक्सर भोजन या आश्रय के लिए गांवों के करीब आती है। वहां पशु चिकित्साधिकारी पश्चिमी वृत्त हल्द्वानी डॉ. आयुष, रेंजर जितेंद्र प्रसाद डिमरी, उप रेंजर धीरेंद्र पंत, वन दरोगा नैन सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह, अनिल बहुगुणा आदि थे।
फिशिंग कैट (प्रियनैलुरस विवरिनस)- एक जंगली बिल्ली की प्रजाति है। एक वयस्क का आकार 57.78 सेमी तक होता है और इसका वजन 5.16 किलोग्राम के बीच होता है। जो घर की बिल्ली के आकार से लगभग दोगुना होता है। फिशिंग कैट एक निपुण तैराक है और अपने नाम के अनुसार मछली को शिकार करने के लिए अक्सर पानी में प्रवेश करती है। यह मछली पकड़ने के लिए गोता लगाने के लिए भी जाना जाता है। वेटलैंड्स इसका का पसंदीदा निवास स्थान है। भारत में गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी की घाटियों और पश्चिमी घाट, हिमालय की तलहटी, सुंदरवन के मैंग्रोव जंगलों में यह कैट मुख्य रूप से पाई जाती हैं।