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राज्य कर विभाग को लगाई 529 करोड़ की चपत, 34 फर्मों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस

Sat, 30 May 2020 03:39 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला देहरादून
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एफआईआर की प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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जीएसटी के तहत फर्जी तरीके से पंजीयन लेकर ई-वे बिल के माध्यम से करोड़ों रुपये का कारोबार दर्शाने वाली 34 फर्मों के खिलाफ 529 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने के आरोप में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। राज्य कर विभाग की कई टीमों ने दिसम्बर 2019 में आयुक्त सौजन्या के निर्देश पर नैनीताल, ऊधमसिंहनगर व देहरादून की दर्जनों फर्मों में छापामारी की थी। ये सभी फर्मे केंद्रीय कर कार्यालय से पंजीकृत थीं।
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ये विभाग द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सर्वे था। जांच में पाया गया कि नैनीताल की 17, काशीपुर जोन की 10 फर्मों, ऊधमसिंह नगर की 03 और देहरादून की 03 फर्मों ने ई-वे बिलों के जरिए विभाग को 529 करोड़ रुपये के कर की चपत लगाई। इनमें से कुछ फर्मों ने मशीनों की खरीद से संबंधित ई-वे बिल भी बनाये। इन फर्मों में उत्पादन होना नहीं पाया गया, जबकि फर्मों द्वारा आंतरिक व बाह्य आपूर्ति दर्शाकर ई वे बिल बनाये गए। उनके द्वारा बिजली के बिलों, भवनों के किराए का गलत विवरण दर्शाया गया है।

भौतिक सत्यापन में फर्मों के कथित भवनों का अस्तित्व नही पाया गया। अक्टूबर 2019 में इनमें से सिर्फ 8 फर्मों ने पोर्टल पर जीएसटी रिटर्न्स प्रस्तुत किया, जबकि शेष फ़र्मों ने नही किया। जांच के उपरांत इन फर्मों का पंजीकरण निरस्त करने की संस्तुति की गई थी। जीएसटी के पोर्टल पर इनमें से 29 फ़र्मों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है, जबकि 5 फर्में अभी एक्टिव है।
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जांच के आधार पर राज्य कर आयुक्त के निर्देश पर उपायुक्त (एसटीएफ) आरएल वर्मा ने सभी 34 फर्मों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है।
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