पंतनगर। देश के पहले कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर में छात्र-छात्राओं के साथ दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। इससे छात्राओं में आक्रोश हैं। छात्राओं ने मामले को राज्यपाल और महिला आयोग तक ले जाने की बात कही है।
1960 में स्थापित पंतनगर कृषि विवि में पूर्व में छात्रों की संख्या अधिक रहती थी लेकिन धीरे-धीरे जागरूकता के चलते छात्राओं की संख्या बढ़ती गई। मौजूद समय में विवि में 62 प्रतिशत छात्राएं अध्ययनरत हैं लेकिन विवि के नियमों के मुताबिक छात्रावास में रहने वाले छात्रों और छात्राओं के प्रवेश का समय अलग-अलग हैं। एक अक्तूबर से छात्राओं के प्रवेश का समय शाम छह बजे निर्धारित करने का आदेश जारी किया है जबकि छात्रों के प्रवेश का समय रात 10 बजे तक है। इससे छात्राओं में नाराजगी है। वह इसे लिंगीय भेदभाव बता रही हैं। यही स्थिति ग्रीष्मकालीन अवधि में भी रहती है। छात्राओं के लिए शाम सात बजे जबकि छात्रों के लिए छात्रावास में लौटने का समय रात 10 बजे तक है।
-वर्जन
पंतनगर विवि के छात्रावासों में छात्रों और छात्राओं के प्रवेश का निर्धारित समय का नियम विवि की स्थापना के समय से ही लागू है। इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ है। उसी नियम के संदर्भ में नया आदेश जारी किया गया है। -डाॅ. विपिन चंद्र ध्यानी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पंतनगर विवि