पब्लिक स्कूल की मनमानी के खिलाफ जनप्रतिनिधियों में आक्रोश देखा गया। गहमागहमी के बीच हुई बैठक में निजी स्कूल प्रबंधन पर तमाम आरोप लगाए गए।
निर्णय लिया गया कि सत्र शुरू होने से पहले फीस का ढांचा सार्वजनिक करना होगा। ताकि अभिभावक अपनी क्षमता की फीस वाले स्कूल में बच्चे को पढ़ा सकें।
शुक्रवार को कोलंबस पब्लिक स्कूल में शिक्षा विभाग अफसरों की मौजूदगी में जनप्रतिनिधियों, छात्र नेताओं और सीबीएसई से जुड़े स्कूल प्रधानाचार्य/प्रबंधकों की बैठक हुई। इसमें चर्चा करते हुए जनप्रतिनिधियों और छात्र नेताओं ने कहा कि आपसी सांठगांठ के चलते ही कापी, किताब और ड्रेस खरीदने के लिए दुकानें तय की गई हैं। वहीं कमीशनखोरी के कारण हर साल पब्लिशर्स बदले जा रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा विभाग अफसरों पर भी नियमों की जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। इस दौरान शिक्षा विभाग अफसरों ने तय किया कि सभी स्कूल प्रबंधकों को नोटिस जारी किया जाएगा कि सत्र से पहले ही फीस ढांचे की सूची सार्वजनिक की जाए और उससे विभाग को भी अवगत कराया जाए। इस पर सभी ने सहमति जताई। कहा कि यदि विभिन्न कार्यक्रम कराने के नाम पर वसूली की जाएगी तो भी नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
वहां सीईओ डा. नीता तिवारी, डीईओ माध्यमिक डा. पीएन सिंह, बीईओ एमडी गौतम, उप शिक्षा अधिकारी डा. गुंजन, ललित मिगलानी, प्रमोद शर्मा, अभिनव छावड़ा, किरन विर्क, गोपाल पटेल, मनोज खेड़ा, अरविंद श्रीवास्तव, एमपी कांडपाल, सत्येंद्र शुक्ला, एमसी उनियाल, हरजीत सिंह, प्रवीण उपाध्याय, सिमरन, वाईडी भट्ट, उषा खोखर, केएन नेगी, नीरज कुमार आदि मौजूद थे।