यूएसनगर जिले से सटे यूपी केे बार्डर से बड़ी तादाद में पशु तस्करी हो रही है। मोटे मुनाफे के चलते गोवंशीय पशु यूपी में चल रहे अवैध स्लाटर हाउस में पहुंचाए जा रहे हैं। पकड़े जाने के डर से तस्कर मुख्य मार्गों के बजाए संपर्क मार्गों के साथ ही छोटे वाहनों से तस्करी को अंजाम दे रहे हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में धीरे-धीरे खेती कम हो रही है। पहाड़ों में खेती के लिए बड़े बैल बेकार माने जाते हैं। लेकिन बैलों के खरीददार नहीं मिलने पर किसान या तो बैलों को तस्करों को औने पौने दामों पर बेच देते हैं या आवारा छोड़ देते हैं। जिसका फायदा उठाकर पशु तस्कर पशुओं को वाहनों से यूपी भेजकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। पहाड़ों से लाकर पशुओं को काशीपुर, बाजपुर, जसपुर, खटीमा, पुलभट्टा, किच्छा, गदरपुर के रास्ते मुरादाबाद जिले के भोजपुर, बहेड़ी, बरेली और भगतपुर ले जाकर वध कर मांस बेचा जाता है।
गदरपुर, किच्छा, सुल्तानपुर पट्टी से सटे यूपी के लिए कई चोर रास्तों का भी तस्कर इस्तेमाल करते हैं। पुलिस की सख्ती की वजह से तस्करों ने बीते कुछ सालों में बड़े वाहनों के बजाय सेंट्रो, मारुति, स्कार्पियो और पिकप से जानवरों की तस्करी करना शुरू कर दिया है। जानकार बताते हैं कि गोवंशीय पशुओं का मांस बेहद महंगा बिकता है। एक गोवंशीय पशु को वधशाला तक पहुंचाने में 5 हजार से 15 हजार तक तस्करों को मिल जाता है।
इसलिए बड़ी तादाद में यूपी के तस्कर अपने साथ स्थानीय लोगों को लालच देकर मिला लेते हैं। हालांकि रामपुर, मुरादाबाद, बहेड़ी, पीलीभीत जिलों में तस्करों के कई गिरोह सक्रिय हैं। सरकार के बनाए कानून और पुलिस की सख्ती भी पशु तस्करी रोकने में नाकाफी साबित हो रही है।