काशीपुर में गन्ना गोष्ठी में भाग लेते मंचासीन अधिकारी।
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वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वह अधिक परते वाली गन्ने की प्रजातियों का चयन कर उगाएं। इससे किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। गन्ना वैज्ञानिकों ने किसानो को कीटों और उवर्रकों के बारे में भी जानकारियां दी।
गन्ना किसान संस्थान और प्रशिक्षण केंद्र काशीपुर की ओर से शुक्रवार को खड़कपुर स्थित एक बरातघर में प्रदेश स्तरीय गोष्ठी का शुभारंभ संयुक्त गन्ना आयुक्त चंद्र सिंह इमलाल ने किया। गोष्ठी में किसानों को गन्ने की बसंत कालीन बुवाई, नवीनतम प्रजातियों और चीनी परता में सुधार के बारे में बताया गया। गोष्ठी में चर्चा की गई कि किस प्रजाति की बुवाई कर किसान ज्यादा मुनाफा हासिल कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने गन्ने में लगने वाली बीमारियों से फसल बचाने के तरीके भी सुझाएं। गन्ना अनुसंधान केंद्र काशीपुर के प्रभारी अधिकारी डॉ. एसएस जीना ने गन्ने की नवीनतम प्रजातियों के बारे में बताया। कहा कि बसंत कालीन गन्ना बुवाई के लिए स्वीकृत नवीनतम प्रजातियों का चयन करते समय किसान खास सावधानी बरतें।
पंतनगर विवि के सहायक अध्यापक डॉ. रवि मौर्य ने गन्ने की पौध और पेड़ी में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान बताई। केंद्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. संजय कुमार ने बसंतकालीन गन्ने के साथ सहफसली के बारे में उपयोगी जानकारियां दी। वैज्ञानिक सिद्धार्थ कश्यप ने संतुलित उवर्रक व जैविक खेती के बारे में बताया। संचालन कपिल गुप्ता ने किया। वहां सहायक गन्ना आयुक्त (देहरादून) हिमानी पाठक, जनसंपर्क अधिकारी निलेश कुमार, योगेंद्र कुमार, जीवन पंत, उदल सिंह, मो. इब्राहिम, आदित्य कुमार, सुखविंदर सिंह, गुरदेव सिंह आदि मौजूद रहे।