काशीपुर। किसानों को बेमौसमी धान की जगह मक्के की बुआई के लिए प्रेरित करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र प्रयासरत है। इसी के चलते बुधवार को विकास खंड सभागार में ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में मक्का की खेती विषय पर कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया।
केंद्र के वैज्ञानिक गिरीश चंद्र जोशी ने मक्का और दलहन फसलों के उत्पादन के बारे में ग्रीष्मकालीन धान के दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी दी। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. अभय सक्सेना ने बताया कि दो बार धान की फसल लगाने पर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। वहीं, मक्का की फसल का उत्पादन करने पर कृषकों की आय पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।
कहा कि गर्मी वाले धान के स्थान पर मक्का के लिए पांच मार्च तक बुआई कर सकते हैं। इसके बाद कृषक साइलेज के लिए मक्का की फसल ले सकते हैं। इस दौरान कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. कल्याण सिंह, नगर कृषक प्रतिनिधि बलकार सिंह, टीका सिंह, गजेंद्र सिरोही, जगतजीत सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता एसडीएम अभय प्रताप सिंह ने की।
गोष्ठी में किसानों ने कहा कि पर्यावरण और जलस्रोतों पर फैक्टरी से निकलने वाला गंदा पानी भी असर डाल रहा है। ऐसे में गर्मियों में उनपर भी तीन महीने के लिए रोक लगनी चाहिए। धान पर सिर्फ पाबंदी क्यों लगाई जा रही है।