सिडकुल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार
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सितारगंज। राज्य के उद्योग मंदी के दौर से ठीक से उभरे भी नहीं कि अब उन पर महंगी बिजली की मार पड़ने लगी है। एक साल में दो बार बिजली दरें बढ़ने से उत्पादन की लागत भी बढ़ गई। इसका नुकसान उद्योगों को उठाना पड़ रहा है।
बृहस्पतिवार को उद्योगपतियों ने बढ़ते बिजली के दामों का विरोध किया। सितारगंज सिडकुल इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने बयान जारी कर बताया कि अप्रैल में बिजली की दरें बढ़ाई गई थीं। पांच महीने ही बीते थे कि एक बार फिर सरकार ने बिजली के दाम बढ़ा दिए। इससे उद्योगों पर महंगी बिजली की मार पड़ रही है और कई उद्योगों की कमर ही टूट गई। बताया कि सिडकुल की कुछ फैक्ट्रियों पर तो 50-60 लाख रुपये प्रति महीने का बिजली बिल बढ़ गया है। इससे उत्पादन की लागत में भी बढ़ोतरी हो गई है और उत्पादन भी महंगे होने लगे। इससे बाजार में बिक्री घट रही है। उन्होंने कहा कि बिजली के दाम लगातार बढ़ेंगे तो राज्य में स्थापित उद्योग प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएंगे और धीरे-धीरे उद्योग बंद होने लगेंगे। कहा कि ऑटो मोबाइल और अन्य उद्योगों में मंदी की वजह से हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। इस तरह के आर्थिक कदम उद्योगों की कमर तोड़ देंगे और नये उद्योग भी राज्य से किनारा कर लेंगे। कहा कि यहां के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में तैयार उनके कंप्टीशन पर उत्पाद को बेचने में सक्षम नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से बिजली के बढ़े दाम वापस लेने की मांग की।