समय पर निकाय चुनाव में खर्च का ब्योरा उपलब्ध नहीं कराने वाले प्रत्याशियों की आखिरी सूची भी जारी हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 209 प्रत्याशियों की छह साल की अवधि में चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है। ये सभी निकाय चुनाव 2013 में भाग्य आजमा चुके हैं।
इस तरह ये लोग आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव में दावेदारी करने योग्य भी नहीं रहेंगे। इससे पहले भी आयोग 110 लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा चुका है।
अप्रैल 2013 में निकाय चुनाव कराए गए थे। जिले के 14 निकायों में अध्यक्ष/मेयर और सभासद/पार्षद के लिए 914 लोगों ने भाग्य आजमाया था। नियमानुसार मतगणना होने के ठीक महीने के भीतर चुनाव में खर्च किए गए ब्योरे का विवरण चुनाव कार्यालय को उपलब्ध कराना होता है। ताकि इसे निर्वाचन आयोग को भेजा जा सके। लेकिन अधिकांश दावेदारों ने समय पर ब्योरा चुनाव कार्यालय को मुहैया नहीं कराया।
जबकि स्थानीय स्तर पर दावेदारों को कई बार नोटिस भी जारी किए थे। इसी मामले में बीती 22 दिसंबर को निर्वाचन आयोग में सुनवाई हुई थी। लेकिन सुनवाई में भी कई लोग नहीं पहुंचे। चुनाव कार्यालय के अनुसार जिले के 14 निकायों में से 12 निकायों के दावेदारों की सूची राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी गई थी। पहली सूची के अनुसार 110 लोगों के अगले छह साल तक चुनाव लड़ने में आयोग ने रोक लगा दी थी। अब जारी दूसरी सूची के अनुसार जसपुर के 30, काशीपुर के 80, शक्तिगढ़ के पांच, दिनेशपुर के 11 निकाय चुनाव प्रत्याशियों पर छह साल के लिए आयोग ने रोक लगा दी है। इसी तरह किच्छा के 48 और सितारगंज के 34 राजनैतिक लोग भी छह साल की अवधि में चुनाव लड़ने से वंचित रहेंगे। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयुक्त सुवर्द्धन ने आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त के मुताबिक डिफाल्टर सदस्यों के अगले छह वर्षों तक चुनाव लड़ने में रोक रहेगी।