आरटीआई के तहत आवेदक को पूरी सूचनाएं नहीं देना सिंचाई विभाग के लोक सूचना अधिकारी/ ईई को भारी पड़ा है। सूचना आयुक्त ने ईई पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए आवेदक को मांगी सूचनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त ने लोक सूचना अधिकारी की सूचना नहीं देने की दलील भी नकारी है।
दरअसल सिंचाई विभाग से रिटायर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दयाधर जोशी ने आरटीआई के तहत बीते 11 जून को सिंचाई खंड काशीपुर से 13 बिंदुओं में सूचनाएं मांगी थी। आवेदक से 886 का अतिरिक्त शुल्क मांगा गया जो उसने जमा कर दिया। आवेदक ने तुमड़िया डाम में पेड़ों की नीलामी, विकास कार्यों की एवज में भुगतान किये चेकों की डिटेल, विभिन्न कार्यों के एग्रीमेंट सहित अनेक दस्तावेज मांगे थे।
1 जुलाई को लोक सूचना अधिकारी ने 13 में से पांच बिंदुओं पर सूचना उपलब्ध नहीं कराई। जिसके बाद आवेदक ने विभागीय अपीलीय अधिकारी के पास अपील की। लेकिन फिर भी उक्त बिंदुओं पर सूचनाएं नहीं दी गई। मामला सूचना आयोग पहुंचा और आयोग ने सूचनाएं नहीं देने पर अधिशासी अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा।
स्पष्टीकरण में ईई ने आवेदक की नीयत पर कईं तरह के सवाल खड़े किए और इन सवालों को आधार बनाते हुए सूचनाएं नहीं देने की बात कही थी। यह भी कहा गया कि जो 886 रुपये शुल्क लिया गया था, वो लौटा दिया गया।
राज्य सूचना आयुक्त सुरेंद्र सिंह रावत ने सुनवाई करते हुए लोक सूचना अधिकारी/ईई पर पूर्ण रुप से सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और जुर्माने की राशि एक महीने के भीतर राजकोष में जमा करने के आदेश दिए। इसके अलावा जो सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं, उन्हें उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।