रुद्रपुर। प्रशासन ने ग्रीष्मकालीन धान की खेती को पर्यावरण के लिहाज से खतरनाक मानते हुए जिलेभर में ग्रीष्मकालीन धान की सीधी बुआई, नर्सरी, रोपाई पर निश्चित अवधि के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। तीन विकासखंडों को भूमिगत जल के लिहाज से रेड जोन में शामिल किया है।
डीएम उदयराज सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जिले में 1.08 लाख हेक्टेयर में खरीफ के मौसम में धान की खेती की जाती है। कृषक अतिरिक्त कृषि आय के लिए ग्रीष्मकालीन धान की खेती करते हैं, जो पर्यावरण के दृष्टिकोण से हानिकारक है। कहा है कि ग्रीष्मकाल में धान की खेती करने से पर्यावरण को विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंच रहा है। आदेश में कहा गया है कि विकासखंड जसपुर, काशीपुर और बाजपुर में पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। भूमिगत जलस्तर नीचे जाने के लिहाज से तीनों विकासखंडों को रेड जोन में आ गए हैं। भूमिगत जलस्तर की स्थिति ठीक रखने के लिए ग्रीष्मकालीन धान की खेती रोकने और विकल्प के तौर पर ग्रीष्मकालीन मक्का, गन्ना, दलहनी, तिलहनी व अन्य औद्योगिक फसलों को बढ़ावा देने के सुझाव दिए गए हैं।
प्रतिबंध के कारण
-भूमिगत जलस्तर का लगातार गिरना, जल की गुणवत्ता प्रभावित होना
-मृदा का स्वास्थ्य प्रभावित होना
-मृदा में कड़ी परत न बनना
-वर्ष में दो बार पडलिंग से मिथेन गैस का उत्पन्न होना
-खरीफ की मुख्य फसल-धान में कीट और रोगों का प्रकोप अधिक होने से मुख्य फसल के उत्पादन लागत में काफी वृद्धि होना, फसल में रसायन अवशिष्ट का अधिक हो जाना
प्रतिबंध की अवधि
रुद्रपुर। डीएम की ओर से गत 29 नवंबर को जारी आदेश में धान की सीधी बुआई पर जिले में आगामी 10 मई से 30 जून, धान की नर्सरी पर एक मई से 15 अगस्त तक और धान की रोपाई पर 10 जून से 15 अगस्त तक प्रतिबंध लगाया है। इस आदेश के विरुद्ध 30 दिन के भीतर प्रतिवेदन मुख्य कृषि अधिकारी के कार्यालय में किया जा सकता है। संवाद
ऐसे किसान ले सकते हैं अनुमति
रुद्रपुर। डीएम के आदेश में कहा गया है कि दलदली और जल भराव वाली कृषि भूमि जहां पर गन्ने और ग्रीष्मकालीन मक्के का उत्पादन अच्छा नहीं हो सकता है। ऐसी कृषि भूमि वाले किसान मुख्य कृषि अधिकारी से धान की खेती के लिए अनुमति ले सकते हैं। संवाद
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