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Uttarakhand: इंजीनियर की स्वरोजगार की गाड़ी को केंचुओं ने दी रफ्तार, सत्यम ने नौकरी छोड़कर खेती अपनाई

Sat, 10 May 2025 01:12 PM IST
हीरा मेहरा आदर्श सिंह, अमर उजाला

सार

केंचुओं ने एक इंजीनियर की स्वरोजगार की गाड़ी को रफ्तार दी है। काशीपुर निवासी सत्यम नौकरी छोड़कर पांच साल से इनकी मदद से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं।
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खेतों में वर्मी कंपोस्ट खाद के प्लांट पर मौजूद सत्यम शर्मा, वैज्ञानिक अनिल चंद्रा और नमित। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंचुओं ने एक इंजीनियर की स्वरोजगार की गाड़ी को रफ्तार दी है। काशीपुर निवासी सत्यम नौकरी छोड़कर पांच साल से इनकी मदद से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं। अब तक वह करीब पांच हजार क्विंटल खाद सप्लाई कर चुके हैं। वह खुद भी जैविक खेती कर रहे हैं। काशीपुर के लालपुर कॉलोनी निवासी सत्यम शर्मा ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी में लगभग ढाई साल 30000 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी की। काम पसंद नहीं आया तो नौकरी छोड़कर घर आ गए। फिर कुछ समय तक एक चीनी मिल में काम किया।

उन्होंने देखा कि किसान जाने-अनजाने में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों, यूरिया व अन्य रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने लोगों को जैविक खेती के लिए जागरूक करने की सोची और केवीके के सहयोग से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने का काम शुरू किया।

सत्यम ने इकोफील्ड्स एग्रो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना की, जिससे वर्मी कंपोस्ट एवं जैविक कृषि उत्पादों को ऑनलाइन विक्रय भी किया जा सके। इसके बाद उन्होंने विपणन के लिए ऑर्गेनीयार्ड नाम से ट्रेडमार्क लेकर अपने उत्पाद को एक नया स्वरूप दिया।

खाद में इस्तेमाल हो रहे ऑस्ट्रेलियाई और अफ्रीकी केंचुए

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खाद के लिए 80 से 90 प्रतिशत गाय के गोबर का इस्तेमाल होता है। इसमें सूखी पत्तियां मिलाईं जाती हैं। नाइट्रोजन बढ़ाने के लिए हरा चारा भी मिक्स करते हैं। इस खाद में सबसे जरूरी केंचुए होते हैं। इसके लिए ऑस्ट्रेलियाई और दक्षिणी अफ्रीकी केंचुए खाद में मिलाते हैं। करीब 30 क्विंटल खाद के लिए दस किलो केंचुए मिलाने पड़ते हैं। इसके बाद इनकी संख्या बढ़ती रहती है। एक महीने में खाद तैयार हो जाती है। सत्यम ने बताया कि वह सालाना 1000 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर रहे हैं। एक क्विंटल खाद 800 रुपये में बिकती है। इसे ऊधमसिंह नगर के अलावा यूपी के किसान भी लेने के लिए आते हैं।

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में उपयोगी
वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद का बेहतरीन विकल्प है। इसे केंचुएं छोड़ दिए जाते हैं। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक, कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो पौधों के बेहतर विकास में सहायक होते हैं। यह खाद पौधों की जड़ों को मजबूत करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। इसे अपने खेतों में इस्तेमाल कर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रख सकते हैं। इसमें मौजूद जैविक तत्व मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे सिंचाई की जरूरत कम होती है।  

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-डॉ. अनिल चंद्रा, उद्यान वैज्ञानिक

इन अवॉर्ड से हो चुके हैं सम्मानित
वर्ष 2020 में एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट (आतमा) उत्तराखंड सरकार की ओर से सत्यम को सर्वश्रेष्ठ किसान सम्मान ‘किसान श्री’ से सम्मानित किया गया। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से ‘प्रगतिशील कृषक’ सम्मान, जिले का सर्वश्रेष्ठ कृषक अवॉर्ड ‘किसान भूषण’ और महिंद्रा की ओर से ‘डिस्ट्रिक मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।

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