केंचुओं ने एक इंजीनियर की स्वरोजगार की गाड़ी को रफ्तार दी है। काशीपुर निवासी सत्यम नौकरी छोड़कर पांच साल से इनकी मदद से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं। अब तक वह करीब पांच हजार क्विंटल खाद सप्लाई कर चुके हैं। वह खुद भी जैविक खेती कर रहे हैं। काशीपुर के लालपुर कॉलोनी निवासी सत्यम शर्मा ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की एक कंपनी में लगभग ढाई साल 30000 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी की। काम पसंद नहीं आया तो नौकरी छोड़कर घर आ गए। फिर कुछ समय तक एक चीनी मिल में काम किया।
उन्होंने देखा कि किसान जाने-अनजाने में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों, यूरिया व अन्य रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने लोगों को जैविक खेती के लिए जागरूक करने की सोची और केवीके के सहयोग से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने का काम शुरू किया।
सत्यम ने इकोफील्ड्स एग्रो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना की, जिससे वर्मी कंपोस्ट एवं जैविक कृषि उत्पादों को ऑनलाइन विक्रय भी किया जा सके। इसके बाद उन्होंने विपणन के लिए ऑर्गेनीयार्ड नाम से ट्रेडमार्क लेकर अपने उत्पाद को एक नया स्वरूप दिया।
खाद में इस्तेमाल हो रहे ऑस्ट्रेलियाई और अफ्रीकी केंचुए
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में उपयोगी
वर्मी कंपोस्ट जैविक खाद का बेहतरीन विकल्प है। इसे केंचुएं छोड़ दिए जाते हैं। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक, कैल्शियम जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो पौधों के बेहतर विकास में सहायक होते हैं। यह खाद पौधों की जड़ों को मजबूत करने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती है। इसे अपने खेतों में इस्तेमाल कर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रख सकते हैं। इसमें मौजूद जैविक तत्व मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाते हैं, जिससे सिंचाई की जरूरत कम होती है।