पंतनगर। बीते दिन तेज हवा के बीच सीजन की पहली बारिश हुई। इससे कहीं-कहीं फसलें बिछ गई। ऐसे में किसान फसलों की सिंचाई से बचें और उनमें किसी भी प्रकार के रासायनिक प्रयोग न करें।
जीबी पंत कृषि व प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डाॅ. अजित सिंह नैन के अनुसार अभी तेज सतही हवा, आंधी, गरज और बिजली गिरने की संभावना है। इस दौरान गेहूं और जौ की फसल में सिंचाई करने से बचें और रसायनों का प्रयोग सूखे दिनों में ही करें। चने की फसल में फूल आने और फली बनने की अवस्था में सिंचाई की आवश्यकता होती है।
सिंचाई केवल आवश्यकता पड़ने पर ही करें। रेपसीड फसल पकने पर उसकी कटाई करें, और उसे बारीक काटने से पहले अच्छी तरह सूखा लें। फूल आने और फली बनने की अवस्था में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। बताया कि गन्ने की फसल की कटाई 16-18 फीसदी ब्रिक्स मान पर की जानी चाहिए। शरद ऋतु में गन्ने में उचित कृषि प्रक्रियाओं का पालन करें।
प्याज की पौध को पाले से बचाएं
डाॅ. नैन ने बताया कि प्याज की पौध को पाले और ठंड से बचाना चाहिए ताकि हवा और पानी का आवागमन सुचारु रूप से हो सके। इसके अलावा टमाटर, मिर्च और आलू की फसल में किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग शुष्क दिनों में ही किया जाना चाहिए।
पशुओं को सर्दी से बचाएं
डाॅ. नैन ने बताया कि पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए उनके भोजन में तेल और गुड़ की मात्रा बढ़ाएं। उन्हें अजवाइन भी दें और उनके लिए उचित बाड़ा भी बनाएं। शीतला रोग से बचाने के लिए उनका टीकाकरण करें। अतिरिक्त ऊर्जा की पूर्ति के लिए उनके चारे में 10 फीसदी की बढ़ोतरी करें।
मुर्गियों को दें एफ्लाॅक्सियोसिस की दवा
डाॅ. नैन ने बताया कि पशु चिकित्सक के निर्देशानुसार मुर्गियों के आहार में वृद्धि के कारण होने वाले एफ्लाॅक्सियोसिस के लिए दवा दी जानी चाहिए।