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Udham Singh Nagar News: चुनाव में देरी के चलते वार्डों से दूर हो रहा विकास, लोग बोले- हमें चाहिए स्थानीय सरकार

Wed, 11 Dec 2024 12:13 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, रुद्रपुर/ ऊधम सिंह नगर

सार

रुद्रपुर शहर की सरकार बनने में हो रही देरी से वार्डों में विकास कार्य ठप से हो गए हैं। छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए लोगों को निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिससे सभी परेशान है।

 
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नगर निगम रुद्रपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रुद्रपुर शहर की सरकार बनने में हो रही देरी से वार्डों में विकास कार्य ठप से हो गए हैं। पार्षद और मेयर स्तर से हल होने वालीं समस्याओं के लिए लोगों को नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यही नहीं, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन सहित अन्य कार्यों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। निगम स्तर से भी कई बार दिक्कतें हल करने में देरी और मामले लटकाए रखने से लोगों में नाराजगी भी है। दरअसल एक दिसंबर 2023 को नगर निगम का कार्यकाल खत्म हुआ था। इसके बाद निगम में प्रशासक के रूप में डीएम को नियुक्त किया गया था।

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प्रशासन के कार्यकाल को एक साल से अधिक हो चुका है, लेकिन चुनाव की तारीख पर संशय के बादल नहीं छंट पाए हैं। चुनाव नहीं होने का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। निगम बोर्ड की ओर से केंद्र और राज्य वित्त से मिलने वाले बजट से एक साल में दस करोड़ रुपये के विकास कार्यों के प्रस्ताव पास कराए जाते थे। ये प्रस्ताव स्थानीय लोगों की मांग पर पार्षदों की ओर से निगम को दिए जाते थे। इनमें सड़क, सीसी रोड, टैक्स, विशेष सुविधा, नाली, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सफाई सहित अन्य कार्य शामिल होते थे।

इसके अलावा खराब लाइट, सड़क पर गड्ढे, बंद नाली, जलभराव, फॉगिंग सहित कई समस्याएं पार्षद व मेयर स्तर से ही हल हो जाती थीं लेकिन बोर्ड भंग होने के बाद वार्डों की छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए लोगों को निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

प्रतिक्रिया:

बोर्ड भंग होने के बाद समय से दूसरा बोर्ड का गठन होना चाहिए लेकिन एक साल हो चुका है और सरकार चुनाव से बच रही है। बोर्ड के अस्तित्व में रहने से सड़क, नाली सहित तमाम कार्य होते हैं लेकिन प्रशासक का सीमित दायरा होता है। नाली, सीसी जैसे छोटे कार्य नहीं हो पा रहे हैं। लोग वार्ड के पार्षद से जो समस्याएं हल करा लेते थे, उसके लिए निगम के चक्कर लगाने के बाद ही निस्तारण नहीं हो पा रहा है। सरकार को चुनाव जल्द कराने चाहिए।
- मीना शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष, रुद्रपुर

 

बोर्ड के पास सांविधानिक शक्ति होती है। बोर्ड जनहित में कोई भी प्रस्ताव पास कर सकता है। पार्षदों के माध्यम से बोर्ड बैठक में रखी जाने वाली समस्याओं पर निर्णय होते हैं। उन्होंने जनता की सहूलियत के लिए जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन सहित अन्य कार्य के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया था और कार्यकाल खत्म होने के बाद यह सिस्टम बंद हो गया है। वार्डों से समस्याएं लेकर निगम आने वालों की कई बार सुनवाई नहीं हो पाती है। लोगों को छोटी छोटी समस्याओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

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- रामपाल सिंह, निवर्तमान मेयर, रुद्रपुर

निगम का बोर्ड भंग होने के बाद से ही वार्डों में विकास कार्य ठप पड़े हैं। छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर लोग परेशान घूम रहे हैं। अपने क्षेत्र में स्थित जूस फैक्टरी वाली सड़क की बदहाली को लेकर नगर निगम में कई बार जा चुका हूं, मगर सुनवाई नहीं हो पा रही है। अगर बोर्ड अस्तित्व में होता तो पार्षद व मेयर के माध्यम से समस्या हल हो जाती। उनकी मांग पर विधायक ने भी निगम अधिकारियों को फोन किया था लेकिन सड़क का हाल ठीक नहीं हो पाया है। लोगों को समय पर जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र तक नहीं मिल पा रहे हैं।
- जीसी परगाई, प्रीत विहार, रुद्रपुर।

निगम में प्रशासक की नियुक्ति होने पर वार्डों में समुचित विकास नहीं हो पाता है। वार्डों की समस्याओं से वहां से चुने गए पार्षद ज्यादा वाकिफ होते हैं और स्थानीय लोग अपने पार्षद के समक्ष बेबाकी से समस्याएं रखकर हल कराते हैं। इन समस्याओं के लिए कम ही लोग निगम जाते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को सबसे अधिक दिक्कतें हो रही हैं। प्रशासक की निगरानी में काम हो रहे हैं, लेकिन वार्डों में कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
- गिरीश जोशी, सिंह कॉलोनी, रुद्रपुर।

जनता की समस्याओं को हल करने के लिए डॉग वैन, कूड़ा गाड़ी, स्ट्रीट लाइट आदि से संबंधित हेल्पलाइन नंबर जारी हैं। पार्षदों के ग्रुप मे आई हेल्प यू से भी मिलने वालीं शिकायतों को हल किया जाता है। एक साल में दस करोड़ के काम किए गए हैं। इनमें सड़कों के अलावा वेंडिंग जोन जैसा बड़ा काम भी शामिल है। जनता की समस्याओं को प्राथमिकता से हल किया जा रहा है। सिस्टम में जहां पर कमी दिखती है, उसमें सुधार किया जाता है। जनहित सर्वोपरि है।
- नरेश दुर्गापाल, नगर आयुक्त, रुद्रपुर।

स्थानीय सरकार नहीं होने से अटके आमजन के कार्य
काशीपुर में लगभग एक साल पहले नगर निगम का कार्यकाल खत्म होने के बाद से प्रशासक निकाय के कार्यों को देख रहे हैं। ऐसे में आमजन की समस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसकी मुख्य वजह आमजन को सीधे प्रशासक से मिलने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

 

2 दिसंबर 2023 को नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो गया था।कार्यकाल खत्म होने के बाद निगम के विभागीय कार्यों पर तो कोई असर नहीं पड़ा लेकिन आमजन की समस्याएं बढ़ गईं। निगम में प्रतिनिधि नहीं होने से आमजन की सड़क, नाली, पानी निकासी, स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। पहले जनप्रतिनिधि संबंधित अधिकारियों से वार्ता करके समय से लोगों के काम करवा देते थे। अब आमजन की पहुंच प्रशासक तक नहीं होने से उनकी समस्याओं का हल नहीं हो पा रहा है।

 

लोगों की बात

स्थानीय सरकार नहीं होने से सरकारी अधिकारी जनसमस्याओं पर अधिक ध्यान नहीं देते हैं। जनप्रतिनिधि चुनकर आता है तो वह अपने क्षेत्र की समस्या को समझता है और उसका निस्तारण कराता है। आज स्थानीय सरकार नहीं होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। लोग निगम कार्यालय के चक्कर काटते रहते हैं। अधिकारी आश्वासन देकर टरका देते हैं।
- राकेश नरूला, व्यापारी नेता।

नगर निगम के प्रशासक के हवाले होने से आम आदमी का खासा नुकसान हो रहा है। प्रशासक तक आमजन का पहुंचना मुश्किल होता है। यदि उनकी स्थानीय सरकार होती है तो वह सीधे मेयर या क्षेत्र के पार्षद से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को उनके सामने रखते। कई वार्डों की सड़कें और नालियां खराब हैं और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है।
-आकाश गर्ग, व्यापारी

जनप्रतिनिधि को सीधे जनता चुनती है और वे अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को समझता है। पिछली बोर्ड बैठक में एबीसी सेंटर, गोशाला, निगम में कांप्लेक्स, पिंक टॉयलेट जैसे कई प्रस्ताव पारित हुए। यदि स्थानीय सरकार होती तो इन सभी कार्यों को गति मिलती।
- ऊषा चौधरी, निवर्तमान मेयर, काशीपुर।

जल्द चुनाव कराए सरकार ताकि समस्याओं का हो निस्तारण
जसपुर नगर पालिका की निवर्तमान पालिकाध्यक्ष मुमताज बेगम ने कहा कि चुनाव में देरी होने के कारण नगर का विकास रुक गया है। जन समस्याओं का निस्तारण नहीं हो रहा है। नगरवासी अपनी समस्याओं को अपने सभासद से साझा करते थे। सभासद नगर पालिका में पहुंचकर अपने वार्ड की समस्याओं से उन्हें अवगत कराते थे। महिलाएं अब समस्याओं के निस्तारण के लिए नगर पालिका नहीं पहुंच पाती हैं। सरकार शीघ्र चुनाव कराए।

नगर पंचायत महुआडाबरा की निवर्तमान अध्यक्ष गायत्री सिंह ने कहा कि जन समस्याओं के निस्तारण के लिए नगर पंचायतवासी एसडीएम कार्यालय एवं नगर पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जन समस्याओं का समय से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। नगर पंचायत का विकास रुक गया है। सरकार को चाहिए की शीघ्र चुनाव कराए।

नगर पालिका बाजपुर के प्रशासक के स्थानांतरित होने से बढ़ेंगी दिक्कतें
बाजपुर नगर पालिका बोर्ड भंग होने से आम नागरिकों के कार्य नहीं हो पा रहे हैं। एसडीएम आरसी तिवारी को स्थानांतरण हो गया। इन्हीं के पास नगर पालिका बाजपुर के प्रशासक का भी चार्ज था। ऐसे में आम नागरिकों की दिक्कतें और बढ़ जाएंगी।

 

जुलाई में बाजपुर नगर पालिका बोर्ड भंग हुआ था। तब से प्रशासन के रूप में एसडीएम आरसी तिवारी चार्ज संभाले थे। प्रशासक रहते हुए आरसी तिवारी ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय, मंडी समिति परिसर पंत पार्क सहित अन्य कई कार्यों को उन्होंने गति दी। साथ रेलवे के अंडर पास की समस्या भी हल की लेकिन स्थानीय सरकार नहीं होने से आमजन को दिक्कतें होती हैं। नगर निवासी निरंजन दास गोयल कहते हैं कि हर व्यक्ति अपने कार्य के लिए एसडीएम के पास नहीं जा पाता है। वर्तमान में कूड़ा उठाने वाला वाहन नियमित रूप से नहीं आ रहा है। सरकार को निकाय चुनाव जल्द कराने चाहिए।

डॉ. नरेंद्र खत्री का कहना है कि जनप्रतिनिधि जनता का नुमाइंदा होता है। वह आमजन की समस्या को विस्तार से सुनता है। एसडीएम के प्रशासक रहते हुए वह अधिक समय नहीं दे पाते हैं। निवर्तमान पालिकाध्यक्ष गुरजीत सिंह गित्ते ने कहा कि उनके आवास पर हर रोज जन्म, मृत्यु प्रमाण और आधार कार्ड अपडेट, पेंशन के फार्मों पर प्रमाणित कराने के लिए बहुत लोग आ रहे हैं। लेकिन अब उनके पास अधिकार नहीं है। प्रशासनिक तौर पर आमजन को फार्मो को प्रमाणित करने में दिक्कत हो रही है।

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