सिडकुल सेक्टर चार स्थित एक सिंथेटिक फैक्ट्री का ड्राई यार्ड फट गया, जिससे वहां काम कर रहे दो आपरेटर बुरी तरह झुलस गए। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक होने पर डॉक्टर ने दोनों को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर कर दिया। पुलिस ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
सिडकुल सेक्टर चार स्थित मैसर्स सालासर सिंथेटिक इंडस्ट्रीज में धागा तैयार किया जाता है। मूल रूप से नवाबगंज बरेली (यूपी) निवासी सोमपाल और बहेड़ी निवासी धमेंद्र यहां मशीन ऑपरेटर हैं और फुलसुंगा खेड़ा में किराये के मकान में रहते हैं। बृहस्पतिवार सुबह करीब छह बजे सोमपाल और धमेंद्र ड्राई यार्ड मशीन पर काम कर रहे थे। इसी दौरान यार्ड में जोर का विस्फोट होने के बाद वह फट गया। इसकी चपेट में आकर धर्मेंद्र और सोमपाल बुरी तरह झुलस गए। कंपनी मैनेजर प्रमोद कुमार ने सिडकुल के दमकल विभाग को घटना की जानकारी दी।
सूचना पर पहुंचे दमकल विभाग के कर्मचारियों ने धुएं में फंसे धर्मेंद्र और सोमपाल को निकालकर उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गंभीर हालत में डॉक्टरों ने उन्हें रेफर कर दिया।
सिडकुल चौकी प्रभारी केजी मठपाल ने बताया कंपनी प्रबंधन हादसे का कारण शार्ट सर्किट बता रहा है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में अगर किसी तरह की लापरवाही मिली तो कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दस साल पुरानी थी दस घंटे गर्मी झेलने वाली यार्ड
सिंथेटिक फैक्ट्री में जिस फुली ड्राई यार्ड की चपेट में आकर धमेंद्र और सोमपाल घायल हुए उस यार्ड को गर्म करने के लिए दस घंटे तक तपाया जाता है। इसके लिए रात भर यार्ड चालू रहता है और गर्म होने पर सुबह उसमें काम किया जाता है। बताया जा रहा है कि यार्ड करीब दस साल पुराना होने के कारण गर्मी के ताप को सहन नहीं कर सका और फट गया।
पुराने अग्निशमन यंत्रों के भरोसे चल रहीं फैक्ट्रियां
सिडकुल में मशीन फटने के कारण होनेे वाली दुर्घटनाएं इससे पहले भी कई बार हो चुकी हैं। सिडकुल में स्थापित करीब 400 से अधिक कंपनियों में बड़ी कंपनियों के पास खुद का दमकल विभाग है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसी फैक्ट्रियां भी हैं जहां अग्निशमन उपकरण तो लगाए गए हैं, लेकिन उन्हें अपडेट नहीं किया है। इसके चलते इस वर्ष दमकल विभाग ने ऐसी ही करीब दस फैक्ट्रियों को एनओसी जारी नहीं की। सिडकुल में फैक्ट्री संचालकों द्वारा बनाए गये अधिकांश हाइड्रेंट भी बंद पड़े हैं। सालासर कंपनी में हाइड्रेंट तो लगा था, लेकिन उसमें हौज पाइप नहीं था। कंपनी द्वारा दमकल विभाग की एनओसी भी नहीं ली गई थी।
सिडकुल की सालासर सिंथेटिक फैक्ट्री में हादसा जर्जर यार्ड के फटने से हुआ है। फैक्ट्री ने दमकल विभाग से एनओसी भी नहीं ली थी। इसके चलते आगे भी फैक्ट्री को एनओसी जारी नहीं की जाएगी।
नरेंद्र सिंह कुंवर, सीएफओ, ऊधमसिंहनगर