काशीपुर। ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक के सेंसर काम नहीं करने से चालकों को ट्रैक पर मैनुअल वाहन चलाकर दिखाना पड़ रहा है। इस दौरान साधारण प्रक्रिया शुरू होने से वाहन चालकों के डीएल आसानी से बनने लगे हैं। वहीं कार्य में पारदर्शिता को लेकर प्रश्न खड़े होने लगे हैं।
एआरटीओ कार्यालय में पिछले साल भवन बनने के दौरान ऑटोमैटिक ड्राइविंग ट्रैक बनाया गया। इसमें सेंसर और कैमरे लगाए गए हैं जिसका कंट्रोल रूम मुख्यालय देहरादून बनाया गया है। इसका मुख्यालय स्तर पर ही एक कंपनी से अनुबंध हुआ है। यह कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया है। इसमें केवल दक्ष चालक के ही डीएल बनने का दावा किया जा रहा है। पिछले साल बरसात में कैमरे खराब होने से मैनुअल टेस्ट लिया जा रहा था। सिस्टम सही होने पर बीती 18 मार्च से ट्रैक शुरू कर दिया गया था। इसके बाद से चालकों को सेंसर युक्त ट्रैक पर वाहन चलाकर टेस्ट देना पड़ रहा था। इसमें अधिकांश चालक बार-बार फेल हो रहे थे। कुछ दक्ष चालकों का टेस्ट पास करने पर डीएल भी बन रहा था। हालांकि ऐसे वाहन चालकों की संख्या बहुत कम थी। 31 मार्च को सेंसर लगाने वाली कंपनी की समय सीमा समाप्त हो गई है। इसके बाद से ट्रैक पर मैनुअल टेस्ट लिया जा रहा है। अब डीएल की संख्या बढ़ने लगी है।
ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक पर लगे सेंसर का अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। नवीनीकरण के लिए मुख्यालय पत्राचार किया गया है। स्वीकृति मिलने पर ट्रैक पर सेंसर शुरू कर दिए जाएंगे। वर्तमान में ट्रैक पर मैन्युअल टेस्ट लिया जा रहा है। - एल्विन रॉक्सी, एआरटीओ प्रशासन काशीपुर
डीएल बनने की संख्या
माह वर्ष 2025 वर्ष 2026
अप्रैल 360 141
मई 240 121
जून 256 221
जुलाई 340 396