पेयजल निगम का राजकीयकरण करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन जोर पकड़ रहा है। अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर अधिकारी और कर्मचारियों ने निर्माण शाखा दफ्तर में तालाबंदी कर धरना दिया। उन्होंने चार महीने के रुके वेतन का भुगतान करने की मांग की है।
मंगलवार को तालाबंदी के बाद धरनास्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि बीते 14 दिसंबर को तत्कालीन सीएम और पेयजल मंत्री के साथ हुई बैठक में निगम के सभी कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मियों को राजकीयकरण होने तक वेतन भत्ते और सेंटेज के अंतर की राशि अनुदान के रुप में अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया था।
तत्कालीन सीएम ने शासनादेश 15 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश अपर मुख्य सचिव पेयजल को दिया था। लेकिन चार महीने बीत चुके हैं, मगर अभी तक शासनादेश निर्गत नहीं हो सका है। जिसके चलते कार्मिकों में गहरा अंसतोष है। वक्ताओं ने चार महीने से वेतन नहीं मिलने और शासन की हठधर्मिता पर आक्रोश जताया।
उन्होंने रुके वेतन का भुगतान करने और निगम का राजकीयकरण की मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन उग्र करने की चेतावनी दी है। इस मौके पर अधिशासी अभियंता पूरन चंद्र लोहुमी, सहायक अभियंता आरआर वर्मा, केके भट्ट, राजेंद्र महतोलिया, दीपक लाल चनियाल, एमसी पंत, अर्चित पाठक, श्याम लाल, कांति बल्लभ आदि मौजूद रहे।