बैलजुड़ी में शव पहुंचने पर विलाप करते परिजन
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बैलजुड़ी गांव में जैसे ही शव पहुंचा तो मृतक के पिता मोहम्मद यामीन न्याय मिलने तक शव को दफन नहीं करने पर अड़ गए। उनको समझाने की कोशिश करने पर एसडीएम और एएसपी को लोगों का आक्रोश झेलना पड़ा।
उसके बाद कांग्रेसी नेता डॉ. यूनुस चौधरी के आवास में बंद कमरे में मृतक के पिता, एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र, देवेंद्र पिंचा, एसडीएम दयानंद सरस्वती, मोहम्मद अशरफ, हसीन खान सहित अन्य लोगों की मौजूदगी में वार्ता हुई। इसमें मृतक परिवार को 25 लाख का मुआवजा, नौकरी और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग उठाई गई। करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी के लिए तीन दिन का समय मांगा। एसडीएम ने आचार संहिता का हवाला देते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने बंद कमरे में वार्ता को लेकर कड़ा विरोध भी जताया। वार्ता होने के बाद अफसर गांव से लौट गए।
पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही जियाउद्दीन का शव बैलजुड़ी गांव में पहुंचा तो पूरे गांव में मातम छा गया। बुधवार की सुबह करीब सवा 12 बजे जियाउद्दीन का शव बैलजुड़ी गांव स्थित उसके घर लाया गया। दो भाई और बहनों में सबसे बड़े जियाउद्दीन के शव को देखकर परिजन बदहवास हो गए। पूरा मोहल्ला परिजनों और परिचितों की चीख पुकार से गूंज उठा। आसपास के लोगों ने परिजनों को जैसे तैसे ढांढस बंधाया। शव को घर के समीप तिराहे पर रखा गया। शव को देखने के लिए लोगों का जमावड़ा लग गया। अधिकांश लोगों की आंखें नम थी। ग्रामीणों ने बताया कि जियाउद्दीन काशीपुर में एक सोफे की दुकान पर काम करता था। परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी उठाता था। वह बेहद मिलनसार था।