काशीपुर को जिला बनाने की मांग को लेकर अधिवक्ता मुखर हो गए हैं। उन्होंने शहर में रैली निकालकर आम लोगों और सामाजिक संगठनों से सहयोग मांगा।
जसपुर और काशीपुर के अधिवक्ता शनिवार को बार प्रांगण में एकत्र हुए। उन्होंने यहां से नारेबाजी करते हुए रैली निकाली। लकड़ी मंडी, मेन बाजार, कोतवाली रोड होते हुए यह रैली सुभाष चौक में पहुंचकर जनसभा में तब्दील हो गई। वक्ताओं ने कहा कि काशीपुर को जिला बनाए जाने की मांग 60 साल पुरानी है। लोगों जिला स्तरीय कार्य कराने के लिए करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जनता सस्ता और सुलभ न्याय से वंचित रह जाती है।
उन्होंने क्षेत्र की जनता एवं सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं से जिला बनाने के इस आंदोलन को सफल बनाने में सहयोग मांगा। उद्योग व्यापार मंडल, जाट महासभा, क्षत्रिय महासभा, मुस्लिम महासभा, ब्राह्मण महासभा, बीपीएड, एमपीएड बेरोजगार संगठन के सदस्यों ने भी सभा स्थल में पहुंचकर अधिवक्ताओं को समर्थन पत्र सौंपे। इस मौके पर हरीश नेगी, भूपेंद्र गहलौत, शैलेंद्र मिश्रा, आनंद स्वरूप रस्तोगी, दिग्विजय सिंह, सुंदरपाल सिंह, पीताम्बर सिंह, गुलाम साबिर, सुधीर चौहान, राकेश कुमार, शमशाद, नौशाद मौजूद रहे।
प्रदर्शन किया
बाजपुर
काशीपुर को जिला बनाने की मांग को लेकर क्षेत्र के अधिवक्ताओं ने एसडीएम कार्यालय में प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम के पेशकार के माध्यम से सीएम हरीश रावत को ज्ञापन भेजकर चुनाव से पहले काशीपुर को जिला बनाने की मांग की।
बाजपुर बार एसोसिएशन अध्यक्ष कुलवंत सिंह उप्पल और सचिव विजय गर्ग के नेतृत्व में शनिवार को दर्जनों अधिवक्ताओं ने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा काशीपुर में जिला बनाने के लिए समस्त संसाधन और उचित भवन उपलब्ध हैं।
सरकार को संसाधनों में अधिक खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस मौके पर सोहन लाल गोयल, शिवराज राणा, नीरज जौहरी, आफाक मेहरबान, राजेश पांडे, जगदीश राणा, अशोक कांबोज, जय प्रकाश आदि मौजूद थे। मुंसिफ कोर्ट के स्थापित कराने के लिए बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधि मंडल कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य से भी वार्ता की। आर्य ने जल्दी ही मुंफिस कोर्ट स्थापित कराने का भरोसा दिया।
जिला नहीं तो वोट नहीं का नारा घर-घर पहुंचाएंगे
काशीपुर।
फैज-ए-आम कमेटी की ओर से आयोजित विभिन्न संगठनों की बैठक में काशीपुुर जिला न बनाए जाने पर रोष जताया। तय किया गया कि मांग पूरी नहीं होने पर जिला नहीं तो मतदान नहीं का नारा घर-घर पहुंचाया जाएगा। कमेटी अध्यक्ष मुनुवा प्रिंस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की सरकारों ने तराई के साथ पक्षपात किया है। नए जिलों की घोषणा में सारे नाम पर्वतीय क्षेत्रों के ही होते हैं। काशीपुर के नाम की घोषणा किसी भी सरकार ने नहीं की है। वक्ताओं ने कहा कि दोनों राजनैतिक पार्टियों के नेता केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए जिले के नाम का इस्तेमाल करते हैं। काशीपुर के जिला नहीं बनने के लिए क्षेत्र की दोनों ही प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के शीर्ष नेता जिम्मेदार हैं। बैठक में तय किया गया कि जिले के लिए आर-पार लड़ाई लड़ी जाएगी। अध्यक्षता अशोक पैगिया ने की। इस मौके पर विष्णु प्रकाश अग्रवाल, शैलेंद्र मिश्रा, इदरीस माहिगीर, जगमोहन सिंह, रईस अंसारी, अनिल शर्मा, डॉ. कामिल कुरैशी आदि मौजूद रहे।