काशीपुर में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की मांग को लेकर धरना देते किसान।
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काशीपुर। एनएचएआई से भूमि अधिग्रहण का बकाया मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर किसानों का धरना शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा। इस मुद्दे पर भाकियू ने 11 जनवरी को धरनास्थल पर ही महापंचायत बुलाई है। भाकियू ने एनएचएआई के अधिकारियों पर भुगतान में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है।
एनएचएआई की ओर से एनएच निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का मुआवजा ठीक से निर्धारित नहीं करने के विरोध में बांसखेड़ा में धरना चल रहा है।
किसानों का आरोप है कि एनएचएआई ने दोराहा से कुंडा तक सड़क के निर्माण के लिए जमीन ली है, लेकिन किसानों को उनकी भूमि का मुुआवजा नहीं मिल सका है। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों ने बड़ा टैंट लगाकर हॉल बना दिया है। बाजपुर के किसान नेता करम सिंह पड्डा ने धरनास्थल पर पहुंचकर किसानों की मांग का समर्थन किया। भाकियू (युवा) के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह जीतू ने कहा कि मुआवजे की मांग को लेकर 11 जनवरी को महापंचायत बुलाई गई है।
जीतू ने कहा कि एनएचएआई ने 31 मई 2016 को भूमि अधिग्रहण के समय अवार्ड जारी कर गिन्नीखेड़ा में कृषि भूमि की कीमत 45 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर तय की थी। दो माह बाद जुलाई, 2016 में ही भूमि की कीमत 24 लाख प्रति हेक्टेअर तय करते हुए अवार्ड जारी कर दिया। 28 आवासों का मुआवजा भी 24 हजार रुपये वर्गमीटर तय किया था जबकि भुगतान 70 रुपये वर्गमीटर की दर से दिया गया। धरना देने वालों में महिपाल चौहान, मो. हनीफ, रियासत, राजू छीना, मनप्रीत सिंह, फिरोज अहमद, विकास कुमार, राहुल चौधरी, बलजिंदर बंटी आदि थे।