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केंद्रीय योजनाओं पर ही निर्भर डिजाइन सेंटर

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काशीपुर में राजकीय डिजाइन सेंटर का भवन - फोटो : अमर उजाला
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हजारों बुनकरों और छीपियों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने वाला राजकीय डिजाइन सेंटर उपेक्षा का शिकार है। प्रदेश सरकार की बेरुखी के चलते डिजायन सेंटर अब केवल केंद्र सरकार की योजनाओं पर ही निर्भर रह गया है। आलम यह है कि वर्तमान में प्रदेश सरकार की कोई भी योजना सेंटर में संचालित नहीं है। 


बता दें कि 1972 में यूपी के तत्कालीन वित्त एवं कपड़ा उद्योग मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मुरादाबाद रोड में डिजाइन सेंटर स्थापित किया था। इसका मकसद बुनकरों और छीपियों को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना था। प्रशिक्षण के साथ ही बुनकरों, छीपियों को सरकार से ऋण उपलब्ध कराना, विकास संबधित योजनाओं को लागू कराना, स्वास्थ्य पैकेज, हथकरघा प्रदर्शनी लगाना और नये हथकरघा वस्त्रों के आधुनिक डिजाइन तैयार करना था। यूपी सरकार की ओर से जनता जोड़ा धोती से अनुदान वापस लेने के बाद नब्बे के दशक में सेंटर का काम सिमटने लगा था। यूपी के जमाने में सरकार की उपेक्षा के चलते इसका मुख्य भवन तक जीण शीर्ण हो गया था। 
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राज्य गठन के बाद भवन का जीर्णोद्धार तो हुआ, लेकिन योजनाओं का अभाव ही रहा। वर्तमान में वह केन्द्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय की योजनाओं का ही मोहताज रह गया है। केन्द्र सरकार की योजना आती है तो चहल पहल रहती है। लेकिन उसके बाद सन्नाटा पसर रहता है। वर्तमान में राज्य सरकार की कोई योजना संचालित नहीं है। 


जब डिजाइन सेंटर की उपेक्षा हुई तो उस वक्त एनडी तिवारी ने ही पहलकदमी की थी। एनडी के कहने पर ही वर्ष 2001 में तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा मंत्री कांशीराम राणा ने डिजायन सेंटर में बुनकरों के प्रोत्साहन के लिए दीन दयाल उपाध्याय सहित कई योजनाएं चलवाई थी। ये योजनाएं वर्ष 2008-09 तक चली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बनने के बाद एनडी तिवारी ने ही सेंटर के भवन का जीर्णोद्धार कराया था। राज्य सरकार ने कई प्रोत्साहन योजनाएं चलाई थी। 
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कोड:
हथकरघा एवं हस्तशिल्प उद्योग विभाग के सलाहकार फतेहबहादुर सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने महिला उद्यमी योजना एवं मुख्यमंत्री कौशल योजना लागू की है। लेकिन अभी तक प्रशिक्षण के लिए बजट नहीं मिल सका है।  केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय की ओर से बुनकरों को नवीन तकनीकी प्रशिक्षण योजना समय-समय पर चलाई जाती है।


 
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