काशीपुर। एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय के दंत चिकित्सक करीब ढाई महीने से मेडिकल पर हैं। उनकी बीमारी का असर अस्पताल की सेवाओं पर पड़ रहा है। चिकित्सक के नहीं होने से मशीनें धूल फांक रही हैं। रोगियों को प्राइवेट क्लीनिकों में महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 600-700 लोग जांच और इलाज कराने आते हैं। इनमें करीब 50-60 मरीज दांत रोग के होते हैं। औसतन रोज दस मरीज दांत निकलवाने या दांतों की फीलिंग आदि कार्य कराने पहुंचते हैं लेकिन चिकित्सक नहीं होने से उन्हें निजी अस्पताल या क्लीनिक का रुख करना पड़ रहा है। डॉक्टर के नहीं होने से अस्पताल में सहायक तकनीशियन मरीज के दांत की सफाई कर देते हैं। दूसरे चिकित्सक से दर्द की सामान्य दवा लिखवाकर मरीज की सहायता करने का प्रयास कर रहे हैं। तकनीशियन डीएन पांडे ने बताया कि दंत विभाग का पूरा सेटअप, चेयर और मशीनें मौजूद हैं। एक्सरे भी होते हैं। चिकित्सक अस्वस्थ होने के कारण नहीं आ रहे हैं।
इनसेट
दांत निकालने पर खर्च होते हैं 500-1000
अहरपुरा निवासी राजेश, ढकिया गुलाबो निवासी महफूज, अल्ली खां निवासी शाइस्ता ने बताया कि अस्पताल में दो-तीन चक्कर लगा चुके हैं। दांत के चिकित्सक कक्ष में नहीं मिल रहे हैं। इतने लंबे समय से चिकित्सक बीमार हैं तो स्वास्थ्य विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। प्राइवेट क्लीनिक पर एक दांत निकालने के 500 से 1000 रुपये खर्च होते हैं जो गरीब मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
कोट
29 जून से दंत रोग विशेषज्ञ नहीं आ रहे हैं। वह मेडिकल पर चल रहे हैं। उनसे फोन पर भी बात नहीं हो पा रही है। कब तक लौटेंगे इस बारे में स्पष्ट पता नहीं है।-डॉ. संदीप दीक्षित, सीएमएस
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अस्पताल का निरीक्षण करते समय सीएमएस से पूछा था। उन्होंने दंत चिकित्सक के बारे कोई जानकारी नहीं दी। चिकित्सक अगर बीमार हैं तो वैकल्पिक व्यवस्था के प्रयास कि जाएंगे। -डॉ. संजीव गोस्वामी, सीएमओ, ऊधमसिंह नगर