फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरिद्वार के ज्ञान गोदड़ी में ब्राहृणों को गुरुनानक ने दिया था उपदेश

विज्ञापन
नानकमत्ता में योजनाओं का शिलान्यास करते सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत। - फोटो : SITARGANJ
विज्ञापन
नानकमत्ता। सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव का कुमाऊं ही नहीं बल्कि गढ़वाल के ऐतिहासिक तीर्थ स्थल हरिद्वार में भी अपना मुकाम है। शुक्रवार को जब सीएम धार्मिक डेरा कारसेवा पहुंचे तो हरकी पैड़ी में बंद ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा साहिब को खोलने का भी मुद्दा भी उठ गया। यही नहीं, राज्य सरकार में तराई के नेताओं की उपेक्षा का दर्द भी छलका। सीएम भी सिख समाज की मांगों पर गंभीर दिखे।
विज्ञापन

धार्मिक डेरा कार सेवा में सजे दीवान में जहां संत गुरुओं की महिमा का बखान कर रहे थे तो वहीं 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के सिख दंगे की यादें भी ताजा हो गईं। दीवान का संचालन कर रहे भाई अजीत पाल सिंह ने सिख समाज की ओर से तीन मांगों को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के समक्ष रखा। सबसे अहम मांग हरिद्वार के हरकी पैड़ी में बंद ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा साहिब को खोलने की थी।
अजीत पाल के अनुसार 1500 ई. में सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरुनानक देव ने अपने तीसरे भ्रमण पर हरिद्वार में स्थान बनाया था। मान्यता है कि गुरुनानक देव जब हरिद्वार के हरकी पैड़ी पहुंचे थे तो वहां ब्राह्मण पूरब की तरफ रुख करके सूर्य को जल चढ़ा रहे थे। गुरुनानक देव ने ब्राह्मणों को सूर्योदय पर जल चढ़ाते देखा तो खुद भी पश्चिम दिशा की तरफ रुख कर जल चढ़ाने लगे।
विज्ञापन

यह देख ब्राह्मणों ने गुरुनानक के जल चढ़ाने पर सवाल खड़े किए तो गुरुनानक देव ने दोटूक कहा कि जब आप लोग पृथ्वी से सूर्य तक जल पहुंचा सकते हो तो फिर मैं भला यहां से पाकिस्तान के करतारपुर में अपने खेतों को पानी क्यों नहीं भेज सकता। गुरुनानक ने ब्राह्मणों को अपने दोहे ‘नानक आगे सो म्लै जे खट्टे काले दे’ के जरिये ब्राह्मणों को उपदेश दिया।
तब से यह स्थल ज्ञान गोदड़ी के नाम से प्रसिद्ध है। 1984 में जब दंगे हुए तब इस गुरुद्वारा साहिब को बंद कर दिया था, जो आज तक नहीं खुला। जबकि, उत्तराखंड बनने से पहले से समाज इस गुरुद्वारा साहिब को खोलने की मांग कर रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार में सिखों को प्रतिनिधित्व देने और रीठा साहिब को जाने वाली जर्जर सड़क का निर्माण कराने की मांग की। सीएम भी सिखों की इन मांगों पर गंभीर दिखे।
मुख्यमंत्री के नाम में है शेर और सम्राट
नानकमत्ता। धार्मिक डेरा कारसेवा में संतों की बरसी पर आयोजित श्री अखंड पाठ साहिब के भोग में जब सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पहुंचे तो संगत ने जोरदार तरीके से उनका सत्कार किया। हालांकि संचालन कर रहे भाई अजीत पाल सिंह ने सीएम के नाम संबोधन शुरू किया तो दो बार त्रिवेंद्र की जगह हरीश नाम बोला।
इस पर किच्छा विधायक राजेश शुक्ला और उनके पीछे खड़े राजपाल सिंह ने उनकी त्रुटि को इशारा कर सही कराया। इसके बाद संचालक ने सीएम की तारीफ में कसीदे गढ़ दिए और उनके नाम की व्याख्या करते हुए बोले कि त्रिवेंद्र... मतलब ब्रह्मा, विष्णु और महेश, सिंह... मतलब शेर और रावत... मतलब सम्राट है। इसलिए सीएम से इस राज्य की जनता और सिख समाज को बहुत ही उम्मीदें हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें