काशीपुर। भरतपुर न्याय पंचायत के गांवों को काशीपुर तहसील में शामिल करने की मांग को लेकर कुंडा थाना क्षेत्र के कई लोगों ने विधायक हरभजन सिंह चीमा को ज्ञापन सौंपा। चीमा ने कहा कि उनकी इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता हो चुकी है। वह फिर सीएम से बात करेंगे।
भरतपुर न्याय पंचायत के 19 गांवों को काशीपुर तहसील में शामिल करने की मांग डेढ़ दशक से की जा रही है। 2003 में जसपुर तहसील के गठन के बाद काशीपुर तहसील के 19 गांवों को यहां से हटाकर जसपुर से जोड़ दिया, जबकि न्याय पंचायत भरतपुर के अधीन आने वाले लालपुर, बाबरखेड़ा, हरियावाला, शाहगंज, कुंडा, बक्सौरा, टीला, गनेशपुर, केसरीपुर, गिरधई मुंशी, बैंतवाला, कनकपुर, भरतपुर, बगवाड़ा, पस्तौरा, गढीनेगी, किलावली, दुर्गापुर, नवलपुर आदि के लोग इन गांवों को काशीपुर तहसील से जोड़ने की मांग करते रहे हैं।
वर्ष 2008 में डीएम ऊधमसिंह नगर ने अपनी जांच रिपोर्ट में भी इन गांवों को काशीपुर तहसील में शामिल होने की मांग को तर्कसंगत पाया था।
मंगलवार को ग्रामीणों ने विधायक चीमा से कहा कि जसपुर पहुंचने के लिए 20 किमी और काशीपुर पहुंचने के लिए दो से पांच किमी का सफर करना पड़ता है। इससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विधायक चीमा ने शीघ्र ही मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहां साधू सिंह एड, वेद प्रकाश बाठला, गुरमुख सिंह, ओंकारदीप सिंह गिल, पवन अरोरा, सुभाष सिंह, अनूप सिंह, दिलबाग सिंह, कृष्णलाल, अनिल कुमार, बालमुकंद आदि रहे।
तहसील के कुछ क्षेत्र को काशीपुर में मिलाने का विरोध : सिंघल
जसपुर। तहसील क्षेत्र से कुछ क्षेत्र को अलग कर काशीपुर तहसील में शामिल करने के प्रयास का विरोध किया जाएगा। पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद विभिन्न समस्याओं के चलते काशीपुर तहसील से अलग कर 13 जनवरी 2004 को जसपुर तहसील का नवनिर्माण तत्कालीन सरकार ने किया था। अब जसपुर तहसील के कुछ क्षेत्र को अलग करने की कोशिश की जा रही है। इससे क्षेत्रवासियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा। क्योंकि ऐसे प्रयास जसपुर विधानसभा क्षेत्र के विकास में बाधक बनेंगे। वहां पर सुरेंद्र चौहान, डॉ. सुदेश, बलराम तोमर, तरुण गहलौत, सरवन सिद्धू आदि थे।