खराब खानपान बच्चों के दांतों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। बच्चों के दूध के दांत समय पर नहीं गिर रहे हैं। देरी से दांत उखड़ने की वजह से बच्चों के डबल दांत (रिटेंड डेसीडूअस टीथ) होने के मामले सामने आ रहे हैं। इससे बच्चों के दांत टेढ़े मेढ़े हो जाते हैं। अमूमन देखा जाता है कि बच्चे टाॅफी, चाॅकलेट आदि का अधिक सेवन करते हैं। अंगूठा चूसने, लंबे समय तक बोतल से दूध पीने की आदत होती है। पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन, मोमोज आदि जंक फूड से बच्चों के मसूढ़े व दांत कमजोर होने लगते हैं।
दूध के दांत समय पर नहीं उखड़ने से दांत टेढ़े-मेढ़े या डबल दांत निकल रहे हैं। दांत टेढ़े-मेढ़े होने से उसकी सफाई नहीं हो पाती है, जिससे कम उम्र में पायरिया, दांतों में सड़न, कीड़ा लगने का खतरा रहता है। जिला चिकित्सालय के दंत रोग विभाग की ओपीडी में टेढे़-मेढ़े दांतों को सही कराने के लिए हर रोज करीब पांच से छह बच्चे आ रहे हैं। अगर आपके बच्चों के दांत समय से नहीं उखड़ रहे तो देरी न करें। डॉक्टर को दिखाकर समय से इलाज कराएं।
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छह माह की आयु से निकलता है पहला दांत
दंत रोग विशेषज्ञ के अनुसार बच्चों के छह से सात माह की उम्र में निचले के हिस्से में सामने की तरफ पहला दांत निकलता है। उसके बाद ऊपर के हिस्से में दांत निकलता है। इस तरह सामने के दो दांतों को इंसाइजर कहा जाता है। दांत निकलने की सही आयु ढाई साल से लेकर तीन साल तक होती है। इस अंतराल में मुंह के मसूढ़ों में ऊपर-नीचे दोनों हिस्सों पर 20 दांत निकल आते हैं। साढ़े छह से 12 साल तक की आयु में दूध के दांत उखड़ जाते हैं। इस दौरान इसके बाद छह नंबर पर पक्का दांत निकलता है। इसी तरह तीन अन्य कोनों पर भी पक्के दांत निकलते हैं। 12 साल में दूसरा पक्का दांत निकलता है। 17 से 18 साल की आयु में अक्कल दाढ़ निकलती है। संवा
बच्चों के तंदरुस्त दांतों के लिए ऐसे रखें ख्याल:-
- बच्चे के मसूढ़े को स्वच्छ व गीले कपड़े से साफ करें।
- बच्चों को दूध पिलाने के बाद मुहं को अच्छी तरह से साफ करके सुलाएं।
- पहला दांत आने के साथ ही बेबी ब्रश से सफाई शुरु करें।
- मुलायम ब्रश का उपयोग करें, क्लाक, एंटीक्लाक तरीके से ब्रश कराएं।
- दांतों और मसूढ़ों में दर्द, सड़न या कोई परेशानी हो तो दंत चिकित्सक से संपर्क करें।