पांच सौ और हजार रुपए का नोट बंद होने से दिहाड़ी मजदूरों को काम नहीं मिल पा रहा है। दिहाड़ी नहीं मिलने से उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो रहा है। रेलवे स्टेशन के बाहर काम की आस में घंटों खड़े रहने के बाद भी श्रमिकों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। जहां काम मिलता भी है, वहां पहले ही हजार और पांच रुपये लेने को कहा जाता है।
रेलवे स्टेशन के बाहर श्रमिक मंडी में काम की तलाश में स्थानीय श्रमिकों के अलावा भोजपुर, मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा, रोशनपुर, पीपलसाना से भी बड़ी संख्या में श्रमिक रोजाना पहुंचते हैं। दिनभर काम करने के बाद कमाई गई दिहाड़ी से ही परिवार चलता है। बड़े नोट की बंदी के बाद उनके सामने काम की किल्लत है।
कई जगह भवनों का निर्माण रुक गया है और जहां हो भी रहा है वहां पांच सौ या हजार रुपए के नोट मिल रहे हैं। काम नहीं मिलने से श्रमिकों को खाली हाथ ही घरों को लौटना पड़ रहा है। उनके चेहरे पर उदासी के भाव हैं। श्रमिक कहते हैं कि वे रोज कमाते हैं, तभी घर पर चूल्हा जल पाता है। बड़े नोट बंद होने से काम मिलना भी बंद हो गया है। दुकानदार ने भी उधार में राशन देना भी बंद कर दिया है।